गणेश शंकर विद्यार्थी ने सांप्रदायिकता के विरुद्ध खड़े होकर दिया अमर बलिदान
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। 25 मार्च 1931 को कानपुर की सड़कों पर एक ऐसा नजारा देखा गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। गणेश शंकर विद्यार्थी ने सांप्रदायिक दंगों में फंसे निर्दोष लोगों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। मात्र 40 वर्ष की उम्र में उन्होंने साबित कर दिया कि सच्चा पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी केवल कलम नहीं, बल्कि अपनी छाती आगे करके भी देश की सेवा करता है।