नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। नाटो के लड़ाई में शामिल होने से मना करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बौखलाहट अब उनके बयानों में नजर आ रही है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में दावा करते हुए कहा, "संयुक्त राष्ट्र के बिना, नाटो एक कागजी शेर है।"
दरअसल, अमेरिकी राजनीति और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई में नाटो के भाग न लेने की बात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि नाटो की ताकत अमेरिका की भागीदारी पर निर्भर है और उसके बिना यह 'कागजी शेर' के समान है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने नाटो के लिए 'कायर' जैसे शब्द का इस्तेमाल किया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर पोस्ट कर लिखा, ''संयुक्त राज्य अमेरिका के बिना, नाटो एक कागजी शेर है। वे एक परमाणु-संपन्न ईरान के खिलाफ लड़ाई को रोकने के लिए शामिल होना नहीं चाहते थे। अब जब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है, और उनके लिए बहुत कम खतरा है, तो वे उन उच्च तेल कीमतों के बारे में शिकायत करते हैं, जो उन्हें चुकानी पड़ रही हैं।''
ट्रंप ने आगे लिखा, ''वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो एक साधारण सैन्य कदम है और वही एकमात्र कारण है, जिससे तेल की कीमतें ऊंची हैं। उनके लिए यह करना बहुत आसान है, और जोखिम भी बहुत कम है। कायर, और हम इसे याद रखेंगे।"
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा था कि जो देश होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली ऊर्जा और तेल की आपूर्ति पर निर्भर हैं, उन्हें अमेरिका की मदद करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर निराशा भी जताई थी कि कई सहयोगी देश आगे आने से हिचक रहे हैं।
ट्रंप ने कहा था कि कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रणनीतिक समुद्री रास्ते पर काफी हद तक निर्भर हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों का नाम लिया था। ट्रंप ने कहा था कि चीन को भी अमेरिका का आभार जताना चाहिए। उनके मुताबिक जापान अपनी लगभग 95 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए, चीन करीब 91 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया भी अपने तेल और ऊर्जा का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते हासिल करता है।
ट्रंप पहले भी नाटो को लेकर अपनी पुरानी चिंता दोहराते रहे हैं। एक बयान में उन्होंने कहा था कि समस्या यह है कि अमेरिका हमेशा अपने सहयोगियों के लिए खड़ा रहता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत पड़ती है तो कई देश पीछे हट जाते हैं।
--आईएएनएस
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