नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने तारों के झुंडों से जगमगाती एक खूबसूरत सर्पिल आकाशगंगा की शानदार तस्वीर ली है। यह आकाशगंगा एनजीसी 3137 नाम की है, जो एंटलिया (वायु पंप) तारामंडल में पृथ्वी से लगभग 53 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।
यह निकटवर्ती सर्पिल आकाशगंगा खगोलविदों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तारों के जन्म और मृत्यु के पूरे चक्र का अध्ययन करने का बेहतर मौका देती है। साथ ही यह मिल्की वे आकाशगंगा जैसी प्रणाली की झलक भी दिखाती है। एनजीसी 3137 एक ऐसे समूह का हिस्सा है, जो लोकल ग्रुप से काफी मिलता-जुलता है, जिसमें हमारी मिल्की वे और एंड्रोमेडा आकाशगंगा शामिल हैं। इस समूह में भी दो बड़ी सर्पिल आकाशगंगाएं एनजीसी 3137 और एनजीसी 3175 हैं। दोनों समूहों में छोटी-छोटी बौनी आकाशगंगाएं भी हैं।
शोधकर्ता एनजीसी 3175 समूह में 500 से अधिक बौनी आकाशगंगाओं की संभावना तलाश रहे हैं। इस समूह का अध्ययन करके वैज्ञानिक आकाशगंगा की गतिशीलता और व्यवहार को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। हबल टेलीस्कोप ने एनजीसी 3137 को छह अलग-अलग रंग बैंडों में देखकर बहुत विस्तार से तस्वीर तैयार की है। इस तस्वीर में आकाशगंगा का केंद्र धूल भरे बादलों से घिरा दिखता है। केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद है, जिसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग 60 मिलियन गुना ज्यादा माना जा रहा है।
आकाशगंगा हमारे देखने के कोण से काफी झुकी हुई है, जिस वजह से इसकी ढीली और पंख जैसे सर्पिल भुजाओं का अनोखा नजारा दिख रहा है। सबसे आकर्षक हिस्सा इसके चमकीले नीले तारों के घने समूह और लाल गैस के चमकते बादल हैं। ये लाल बादल गर्म और युवा तारों की उपस्थिति बताते हैं जो अभी भी अपने जन्म के नीहारिका क्षेत्रों में हैं। ये तारों के झुंड ही हबल का मुख्य ध्यान खींच रहे हैं।
वैज्ञानिक प्रोफेसर डी. थिलकर के नेतृत्व में ऑब्जर्विंग प्रोग्राम चला रहे हैं, जिसमें 55 पास की आकाशगंगाओं में तारों के झुंडों का अध्ययन किया जा रहा है। यह पीएचएएनजीएस-एचएसटी प्रोग्राम का हिस्सा है। इस प्रोग्राम के तहत हबल के ऑप्टिकल और अल्ट्रावॉयलेट डेटा को जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और एएलएमए के अवलोकनों के साथ जोड़ा जा रहा है। इससे खगोलविदों को सर्पिल आकाशगंगाओं में तारों के जीवन चक्र युवा तारों के जन्म से लेकर प्राचीन तारों के समूहों तक का गहरा और बेजोड़ अध्ययन करने में मदद मिल रही है।
--आईएएनएस
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