भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध: वाणिज्य सचिव

भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध: वाणिज्य सचिव

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को कहा कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर भारत और अमेरिका के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है। दोनों देश फरवरी में हुए रूपरेखा समझौते की शर्तों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

अग्रवाल ने मीडिया से कहा, “हमारा मानना है कि दोनों पक्ष फरवरी में जिस रूपरेखा पर सहमत हुए थे, उसे आगे बढ़ाने और अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ है।”

उन्होंने कहा, “हम व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं और हमारा संपर्क लगातार बना हुआ है।”

दोनों देशों ने फरवरी में बीटीए के पहले चरण को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की थी, लेकिन अमेरिका में नए टैरिफ से जुड़े मुद्दे सामने आने के बाद स्थिति में अनिश्चितता पैदा हुई है।

फिलहाल अमेरिका में धारा 301 के तहत चल रही जांच के कारण भारत के निर्यात पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जा रहा है। यह जांच जबरन श्रम से जुड़ी कथित चिंताओं की पड़ताल कर रही है।

अमेरिकी सीनेट ने प्रतिबंध विधेयक भी पारित कर दिया है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत सहित रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस से तेल आयात करने से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए वित्तीय मदद मिलती है। भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा है और जुलाई के दौरान देश के कुल तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी आधे से अधिक रही।

इस मुद्दे पर वाणिज्य सचिव ने कहा, “यह अमेरिका की विधायी प्रक्रिया है, जो अभी चल रही है और यह उनका आंतरिक मामला है।”

हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर आगे चर्चा करने से इनकार कर दिया।

अग्रवाल ने आगे कहा कि ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता बढ़ाई है। पहले भारत 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का परिवहन इसी स्ट्रेट से होता है।

इसी तरह, भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के स्रोत भी बढ़ाए हैं। पहले भारत छह देशों से एलएनजी आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 15 देशों तक पहुंच गई है। इनमें अमेरिका अब एलएनजी आयात का एक बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में देश के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखना और ऊर्जा के कई स्रोतों तक पहुंच सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में अचानक होने वाले आपूर्ति व्यवधानों का जोखिम कम किया जा सकता है, खासकर तब जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है।

--आईएएनएस

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