नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में की गई 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के बढ़ते घाटे में कमी आने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से कंपनियों को लगभग 52,700 करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह राहत वित्त वर्ष 2026-27 में ओएमसी के अनुमानित कुल घाटे का करीब 15 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल पर अंडर-रिकवरी लगातार बढ़ रही थी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ने के बावजूद खुदरा ईंधन कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया गया। सरकार के अनुमान के अनुसार, तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपए और सालाना लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सालाना तेल खपत पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। पिछले अनुभव बताते हैं कि कीमत बढ़ने के तुरंत बाद खपत में थोड़ी गिरावट आती है, लेकिन बाद में पूरे साल के दौरान मांग फिर सामान्य हो जाती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मई-जून 2026 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई पर इसका तत्काल असर करीब 15 से 20 बेसिस पॉइंट तक हो सकता है। इसी वजह से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि इस बढ़ोतरी का सरकार की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए की कटौती की थी ताकि तेल कंपनियों को राहत मिल सके। इस फैसले से केंद्र सरकार को करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ था।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर ओएमसी को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी को फिर से शून्य किया जाता है, तो इससे केंद्र सरकार को लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए और राज्यों को करीब 80,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि अगर रुपए में और कमजोरी आती है तो ईंधन कीमत बढ़ोतरी से मिलने वाला फायदा खत्म हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर डॉलर के मुकाबले रुपया वित्त वर्ष 2026-27 के औसत 94 रुपए से और 2 रुपए कमजोर होता है, तो घरेलू ईंधन कीमत बढ़ोतरी से मिलने वाला पूरा लाभ समाप्त हो जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया, "रुपया पहले ही एक महत्वपूर्ण गिरावट के स्तर के करीब पहुंच चुका है। इससे आगे अगर मुद्रा में और कमजोरी आती है, तो घरेलू ईंधन कीमत संशोधन से मिलने वाला फायदा काफी हद तक कम हो सकता है।"
--आईएएनएस
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