नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने रविवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में अपना 74वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ईपीएफओ की दो नई सेवाओं की घोषणा की। पहली, सदस्य अब ईपीएफओ की सत्यापित व्हाट्सएप सेवा के माध्यम से अपने पीएफ बैलेंस, हाल की लेनदेन जानकारी और पासबुक संबंधी विवरण प्राप्त कर सकेंगे। दूसरी, आधार सत्यापित और 1,000 रुपए तक की राशि वाले निष्क्रिय ईपीएफ खातों का स्वत: निपटारा किया जाएगा, जिससे लगभग 1 लाख खाताधारकों को लाभ मिलने और करीब 5 करोड़ रुपए उनके खातों में पहुंचने की उम्मीद है।
एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि समारोह के दौरान ईपीएफओ ने सात महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया, जिनमें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार, न्यायिक निर्णयों, हिंदी साहित्य और संवेदनशील प्रशासन से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रीय कार्यालयों, अधिकारियों और कर्मचारियों को भविष्य निधि पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया।
इस दौरान, डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि ईपीएफओ पिछले 74 वर्षों में एक साधारण भविष्य निधि संस्था से विकसित होकर देश की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा संस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि संगठन पर करोड़ों श्रमिकों और पेंशनभोगियों का भरोसा इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि ईपीएफओ आज 8 करोड़ से अधिक अंशधारक सदस्यों और 85 लाख पेंशनभोगियों से जुड़ा हुआ है तथा लगभग 32 लाख करोड़ रुपए के रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संगठन के कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सामाजिक सुरक्षा केवल प्रक्रियाओं से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से संचालित होनी चाहिए। हर श्रमिक की समस्या को सहानुभूति और सम्मान के साथ हल करना जरूरी है क्योंकि श्रमिक ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं।
मांडविया ने आगे कहा कि ईपीएफओ को अगले वर्ष अपने 75वें स्थापना दिवस की ओर बढ़ते हुए श्रमिक-केंद्रित नवाचारों पर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने अधिकारियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 'पंच प्रण' से प्रेरणा लेने और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के बावजूद अंतिम लक्ष्य श्रमिकों और पेंशनभोगियों को बेहतर सेवाएं देना होना चाहिए।
वहीं, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि ईपीएफओ ने सात दशकों से अधिक समय में भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और श्रम सुधारों का लाभ केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक भी पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार, डिजिटल युग में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और संस्थाओं को समय के साथ खुद को लगातार बदलते रहना होगा।
स्थापना दिवस समारोह के दौरान ईपीएफओ की तकनीकी पहल सीटीज 2.01 की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। संगठन ने बताया कि अक्टूबर 2026 में दावों के निपटारे का औसत समय घटकर 2.57 दिन रह गया है। इससे सदस्यों को अपने भविष्य निधि खाते से जुड़ी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक ढंग से मिल रही हैं।
केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने कहा कि ईपीएफओ की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि हर उस दावे, पेंशन और सहायता से मापी जानी चाहिए जो सही समय पर लाभार्थियों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि संगठन का अंतिम लक्ष्य प्रत्येक सदस्य और पेंशनभोगी को सुरक्षा, सम्मान और विश्वास की भावना प्रदान करना है।
--आईएएनएस
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