सागर, 7 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के सागर जिले के 28 वर्षीय दिव्यांश खत्री ने कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छूटने के बाद हार मानने के बजाय अपने सपनों को नए रूप में साकार किया और आज न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
दिव्यांश खत्री का सपना बचपन से ही बड़े फाइव-स्टार होटलों में काम करने का था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद जयपुर से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें गोवा के एक नामी फाइव-स्टार होटल में नौकरी मिल गई। सालाना करीब 5 लाख रुपए के पैकेज ने उनकी मेहनत को सार्थक कर दिया था और भविष्य उज्ज्वल नजर आने लगा था।
लेकिन खुशियां ज्यादा दिन नहीं टिक सकीं। नौकरी शुरू होने के महज दो महीने बाद ही देश में कोरोना महामारी फैल गई। लॉकडाउन के चलते होटल इंडस्ट्री पूरी तरह ठप हो गई। मंदी का असर ऐसा पड़ा कि कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी। इसी दौरान दिव्यांश की भी नौकरी चली गई। मजबूरी में उन्हें सागर लौटना पड़ा। इसके बाद के दो साल उनके जीवन के सबसे कठिन रहे। बेरोजगारी, भविष्य की अनिश्चितता और खर्चों की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया।
इसी कठिन दौर में दिव्यांश ने हालात को समझने और नया रास्ता खोजने का फैसला किया। उन्होंने बाजार की जरूरतों पर ध्यान दिया और महसूस किया कि खाद्य पदार्थों, खासकर ब्रेड और बिस्कुट की मांग हमेशा बनी रहती है। उन्होंने देखा कि बाजार में उपलब्ध ज्यादातर ब्रेड और बिस्कुट मैदे से बने होते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। यहीं से उनके मन में गेहूं के हेल्दी ब्रेड, बिस्कुट और पाव बनाने का विचार आया।
दिव्यांश ने यूट्यूब की मदद से गेहूं से बने उत्पादों को तैयार करने की तकनीक सीखी। सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी, क्योंकि मशीनें खरीदना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि भारत सरकार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन और सब्सिडी देती है। उन्होंने सागर के उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया, जहां उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के बारे में बताया गया।
योजना के तहत दिव्यांश ने लोन के लिए आवेदन किया और उन्हें 10 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ। इस सहायता से उन्होंने अपना फूड प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया। आज उनका प्लांट सफलतापूर्वक चल रहा है, जहां 10 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उनकी सालाना कमाई 10 लाख रुपए से ज्यादा हो चुकी है। उनके प्लांट में गेहूं से बने ब्रेड, बिस्कुट और पाव की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है।
दिव्यांश खत्री ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे खुद की कंपनी शुरू करेंगे और दूसरों को रोजगार देंगे। उनकी यह यात्रा आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो यह सिखाती है कि सही सोच, मेहनत और सरकारी योजनाओं की जानकारी से बेरोजगारी को भी सफलता की कहानी में बदला जा सकता है।
--आईएएनएस
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