नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आना देश के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर के लिए काफी अच्छा है। यह जानकारी शनिवार की ओर से इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की ओर से दी गई।
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन डॉ.ए शक्तिवेल ने पूरे देश की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री की तरफ से व्यापारिक समझौते पर भारत-अमेरिका के साझा बयान का स्वागत किया।
उन्होंने बयान में कहा,"आने वाला दशक टेक्सटाइल व्यापार में भारत का दशक बनने जा रहा है, क्योंकि देश वैश्विक खरीदारों के लिए सबसे पसंदीदा सोर्सिंग स्थलों में से एक के रूप में उभर रहा है।"
शक्तिवेल के अनुसार, "भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन में अपार अवसर पैदा करता है और इससे विशेष रूप से महिलाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए पर्याप्त रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। ग्रामीण भारत के किसानों को भी इससे काफी लाभ होगा, जिससे समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।"
उन्होंने आगे कहा,"टैरिफ कम होने से एक तरफ देश के टेक्सटाइल क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वहीं, दूसरी तरफ यह भारत को टेक्सटाइल क्षेत्र में एक विश्वसनीय सोर्सिंग हब बनने में मदद करेगी।"
इससे नॉन-टैरिफ बाधाओं को भी दूर करने में मदद मिलेगी और अनुपालन का बोझ कम होगा। इससे तेजी से अमेरिका बाजार में भारतीय सामानों को पहुंचाने में मदद मिलेगी।
एईपीसी के चेयरमैन ने कहा,"आने वाला दशक भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर के लिए गोल्डन एरा होने वाला है।"
इससे पहले फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते की सराहना की थी।
इस व्यापारिक समझौते से टेक्साटाइल के अलावा भारत के इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल, लेदर, जेम्स और ज्वेलरी और कृषि क्षेत्र को फायदा होगा।
फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा था कि यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और सभी क्षेत्रों में भारत के निर्यात विकास को मजबूत गति प्रदान करेगा। कम टैरिफ से न केवल मूल्य प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा बल्कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक गहराई से एकीकृत होने में भी मदद मिलेगी।
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