दो नेताओं की हत्या और एक शहर का जागना! वह दिन जिसने अमेरिका को बदल दिया

IANS | November 26, 2025 8:20 PM

नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। सैन फ्रांसिस्को के सिटी हॉल में उस सुबह सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ घंटों बाद शहर एक ऐसे सदमे में डूबने वाला था जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। मेयर जॉर्ज मोस्कोन और सुपरवाइजर हार्वे मिल्क—दोनों अपनी-अपनी बैठकों और दिनचर्या में लगे थे, बिना यह जाने कि कुछ ही देर में उनकी जिंदगी खत्म कर दी जाएगी।

आंधी सा आया किंवदंती बन गया: गिटारिस्ट जिमी हेंड्रिक्स के अंदाज ने पीढ़ियों को दीवाना बनाया

IANS | November 26, 2025 7:07 PM

नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। अगर संगीत की दुनिया में किसी ने गिटार को साधन से ज्यादा एक जादू की छड़ी सरीखा इस्तेमाल किया, तो वो थे जिमी हेंड्रिक्स। उनके बजाने का अंदाज ऐसा था कि जैसे किसी तूफान ने तारों को छुआ हो—बिजली-सा झटका, धुएं-सी गर्मी और एक गहरी भावनात्मक चमक। वे सिर्फ गाने नहीं बजाते थे; वे मंच पर आग लगा देते थे, कभी सचमुच और कभी देखने वालों के जेहन में!

इजरायल में खसरे का बढ़ा प्रकोप: अध्ययन में खुलासा,'कोविड के बाद वैक्सीन से डर जिम्मेदार'

IANS | November 26, 2025 4:53 PM

तेल अवीव, 26 नवंबर (आईएएनएस)। इजरायल इन दिनों हेल्थ सेक्टर के दो मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है। एक तरफ खसरे के बढ़ते मामलों का खतरा है, और दूसरी तरफ लोगों में वैक्सीन के प्रति बढ़ती झिझक है। जिस देश ने वर्षों तक अपने बच्चों को नियमित टीकाकरण में लगभग बेहतरीन रिकॉर्ड कायम रखा था, वहीं अब कोविड-19 महामारी के बाद पैदा हुई वैक्सीनेशन के प्रति अरुचि ने उस भरोसे को कमजोर कर दिया है।

अफ्रीका की जमीन के नीचे दबी है 'दौलत', छुपे खजाने ने बदली जियो पॉलिटिक्स

IANS | November 26, 2025 4:19 PM

नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, नाइजर और सूडान का नाम आते ही हिंसा, गृह युद्ध, प्राकृतिक आपदा या फिर गरीबी-भुखमरी की चर्चा होने लगती है। ये कारण ऐसे हैं जो किसी भी देश को कमजोर करते हैं या दया का पात्र बनाते हैं। लेकिन एक सच ऐसा भी है जो इन देशों की खूबसूरती और अमीरी को दर्शाता है। ऐसी सच्चाई जिसने जियो पॉलिटिक्स को काफी प्रभावित किया है।

27 नवंबर 1895 को अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में रखी थी नोबेल पुरस्कार की नींव

IANS | November 26, 2025 2:13 PM

नई दिल्ली, 26 नवंबर (आईएएनएस)। अल्फ्रेड नोबेल नाम के शख्स ने 27 नवंबर 1895 में नोबेल पुरस्कार की स्थापना की थी। खास बात यह है कि अल्फ्रेड ने इस पुरस्कार का ऐलान अपनी वसीयत में किया था।

1922 में खुला था तूतनखामन की कब्र का मुख्य कक्ष, एक छोटे से सुराग ने खोला सदियों पुराना रहस्य

IANS | November 25, 2025 8:50 PM

नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। इतिहास में एक अद्भुत और रोमांचक अध्याय के रूप में 26 नवंबर 1922 का दिन दर्ज है। इसी दिन ब्रिटिश पुरातत्वविद् हावर्ड कार्टर ने मिस्र के युवा फराओ तुतनखामन की कब्र का मुख्य कक्ष पहली बार खोला और दुनिया को प्राचीन मिस्र की अनमोल विरासत से रूबरू कराया।

थिएटर का सच्चा योद्धा 'गॉर्डन रीड', जिन्होंने मंच पर ही ली आखिरी सांस

IANS | November 25, 2025 8:35 PM

नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। स्कॉटलैंड के हैमिल्टन में 8 जून 1939 को जन्मे गॉर्डन रीड ने अपना पूरा जीवन अभिनय को समर्पित कर दिया। वे हॉलीवुड की चमक-दमक वाले बड़े सितारों की तरह सुर्खियों में नहीं रहे, लेकिन थिएटर, टीवी और फिल्मों में उनका सफर एक साधारण कलाकार की असाधारण जिद की गवाही देता है।

'केनेडी कर्स' से क्या नहीं मिली मुक्ति? अब जेकेएफ की पोती ने बताया- मुझे जानलेवा बीमारी

IANS | November 24, 2025 7:52 PM

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। जॉन एफ केनेडी के परिवार पर एक और काला साया मंडराने लगा है। ऐसा साया जो दशकों बीत जाने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ रहा। जोसेफ पी केनेडी की असमय मृत्यु से शुरू हुआ मनहूस सफर अब तक जारी है।

लॉरेंस हार्वे: वह कलाकार जिसकी जिंदगी फिल्मों की पटकथा जैसी! इसमें मिस्ट्री, रोमांस और ट्रेजेडी भी

IANS | November 24, 2025 6:48 PM

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। यह कहानी एक ऐसे अभिनेता की है जिसने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा तो पर्दे पर चमक बिखेर दी, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे जिंदगी उसकी कमजोरियों और जंगों से भरी रही। लिथुआनिया में ज्वी मोशेह स्किकने नाम से जन्मा एक यहूदी बच्चा, जिसने दूसरे विश्वयुद्ध के खौफ के बीच अपना घर छोड़ा और पहचान की तलाश उसे दक्षिण अफ्रीका से होते हुए इंग्लैंड ले आई। वहीं वह लॉरेंस हार्वे बन गया, एक ऐसा नाम जो भविष्य में ब्रिटिश सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाने वाला था।

'तीन तितलियां', एक क्रांति: मीराबल सिस्टर्स के शहादत की कहानी

IANS | November 24, 2025 5:32 PM

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। डोमिनिकन गणराज्य, 1960। एक ऐसा समय जब बोलना गुनाह और सच कहना सजा बन चुका था। तानाशाह राफेल तुजिलो के शासन में भय और दबाव का ऐसा माहौल था कि लोग नाम लेकर उनकी आलोचना करने से भी डरते थे। लेकिन इसी डर के बीच तीन साधारण-सी दिखने वाली बहनें असाधारण साहस के साथ खड़ी हुईं। नाम था पैट्रिया, मिनर्वा और मारिया टेरेसा मिराबल। वे किसी राजनीतिक घराने से नहीं थीं बल्कि मध्य डोमिनिकन के किसान परिवार से थीं। ये तीनों बेहद खास थीं। उनके भीतर अन्याय के खिलाफ लड़ने का वह जज्बा था जो किसी बड़ी क्रांति को जन्म दे सके।