अक्षय तृतीया के अवसर पर मुंबादेवी मंदिर में आम्र महोत्सव की धूम, रसीले आमों से किया गया मां का शृंगार

IANS | April 19, 2026 1:56 PM

मुंबई, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर के मंदिरों में अक्षय तृतीया के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए पहुंच रही है।

अक्षय तृतीया पर दक्षिण भारत के मंदिरों में होती है विशेष पूजा, चंदन लेपन से लेकर लगाया जाता है पायसम का भोग

IANS | April 19, 2026 9:49 AM

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। 19 अप्रैल को देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसे साल का अत्यंत शुभ 'स्वयं सिद्ध मुहूर्त' माना जाता है।

अक्षय तृतीया : सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ विजय और अभिजित मुहूर्त, देखें पंचांग

IANS | April 19, 2026 8:59 AM

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि खासा महत्व रखती है। इस दिन को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म का कभी क्षय नहीं होता, इसलिए इसे 'अक्षय' कहा जाता है।

अरावली की चोटी पर बना 'बादलों का महल', 17वीं सदी के शाही ठिकाने में दिखता है राजपूत-मुगल कला का संगम

IANS | April 18, 2026 11:45 PM

बूंदी, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान के रेगिस्तान में कई खूबसूरती छिपी है, जो भारत की सुंदरता को और भी बढ़ाने का काम करती है। अरावली पहाड़ियों की ऊंची चोटी पर स्थित बादल महल भी कुछ ऐसा ही है। यह बादलों के बीच बसा एक शाही ठिकाना है। जहां एक तरफ तारागढ़ किले की भव्यता नजर आती है, वहीं दूसरी तरफ नवल सागर झील का शांत पानी दिखाई देता है।

ओरछा का भव्य महल, जहां की रसोई बनी भगवान श्रीरामचंद्र का दरबार, 'दशरथ नंदन' ने रखी थी रानी के सामने 'तीन शर्त'

IANS | April 18, 2026 11:29 PM

ओरछा, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। वास्तुकला की खूबसूरती, भक्ति और सुंदर कथाओं से भरी जगहें देखनी हो तो भारत में ऐसी जगहों की कमी नहीं, जहां भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां वास्तुकला की खूबसूरती आंखों को लुभाती है और भक्ति की कथाएं दिल को छू जाती हैं। मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राजा महल भी ऐसी ही एक अनोखी जगह है। यहां का साधारण सा रसोईघर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का दिव्य दरबार बन चुका है, जहां उनकी पूजा राजा की तरह की जाती है। इस महल से जुड़ी प्राचीन कथा भक्ति, प्रेम और चमत्कार से भरी हुई है।

मां बाराही मंदिर: यहां किसी प्रतिमा की नहीं, सुरंग की होती है पूजा, दर्शन मात्र से दूर होते हैं नेत्र रोग

IANS | April 18, 2026 3:15 PM

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर में मां सती के 51 शक्तिपीठ मंदिर स्थित हैं और हर मंदिर की अपनी आस्था और पौराणिक इतिहास है।

ताबो: यहां आज भी जीवित है बौद्ध विरासत, प्राचीन मठों से लेकर अध्यात्म का अनोखा संगम

IANS | April 18, 2026 2:47 PM

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमालय की गोद में कुछ ऐसी अनोखी जगह छिपी है, जिसके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। उत्तर भारत में पहाड़ों में घूमने के लिए कई पर्यटन स्थल हैं, जहां सबसे लोकप्रिय स्थल है स्पीति घाटी।

19 अप्रैल का पंचांग : बैशाख शुक्ल की द्वितीया तिथि, त्रिपुष्कर योग के साथ अभिजित मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

IANS | April 18, 2026 7:29 AM

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पंचांग बेहद महत्व रखता है। इसके पांचों अंग अर्थात योग, करण, तिथि, वार और नक्षत्र के आधार पर ही दिन की शुरुआत से लेकर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। 19 अप्रैल का पंचांग देखें तो रविवार को बैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है।

आर्किटेक्चरल अजूबा है ओरछा का अद्भुत 'सावन भादो' स्तंभ, इंद्र देव से जुड़ी है मान्यता

IANS | April 17, 2026 11:15 PM

ओरछा, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों में वास्तुकला के अद्भुत उदाहरण देखने को मिल जाते हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश ओरछा के शांत और भव्य माहौल में खड़े किले, मंदिर और कुछ खंभे आगे हैं, जो न सिर्फ आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का अनोखा चमत्कार भी कहे जा सकते हैं। यह इलाका इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा है। ऐसा ही अद्भुत ‘सावन भादो खंभा’ या ‘सावन भादो स्तंभ’ है, जो बुंदेला राजवंश की कलात्मकता, बुद्धिमत्ता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का जीवंत प्रमाण हैं।

1558 में बना नारायण का भव्य मंदिर, सबसे ऊंचे शिखर वाले देवालय के निर्माण के पीछे है भक्ति से भरी अद्भुत कथा

IANS | April 17, 2026 10:57 PM

ओरछा, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है। भारत भूमि के कोने-कोने में भगवान की महिमा का बखान करते कई भव्य और अद्भुत देवालय हैं। ऐसा ही अद्भुत, खूबसूरत वास्तुकला वाला मंदिर मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र भगवान नहीं बल्कि राजा के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर निर्माण के पीछे की कथा भी भक्ति से भरी पड़ी है।