पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस का अभेद्य किला 'जोड़ासांको' कैसे बना टीएमसी का गढ़? इस बार ऐसे बन रहे समीकरण
कोलकाता, 13 फरवरी (आईएएनएस)। अगर आपको लगता है कि पश्चिम बंगाल का जोड़ासांको केवल रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर के लिए जाना जाता है, तो आप शायद उस सियासी हलचल से अनजान हैं जो यहां हर चुनाव में मचता है। दरअसल, इस क्षेत्र के नाम में ही इसका इतिहास छिपा है। 'जोड़ा' यानी 'युगल' और 'सांको' का अर्थ है 'पुल'। ऐसा कहा जाता है कि कभी यहां एक छोटे नाले पर बांस या लकड़ी के दो पुल हुआ करते थे, और वहीं से इसे यह अनोखा नाम मिला।