व्यक्ति विशेष : रांची की गलियों में हिंदी और रामकथा के विलक्षण साधक फादर कामिल बुल्के की स्मृतियां आज भी जीवंत
रांची, 31 अगस्त (आईएएनएस)। गौर वर्ण, लंबा कद, तेजस्वी मुखमंडल, सफेद लंबी दाढ़ी, चमकती आंखें और हाथ में किताब। 1980 के दशक तक रांची की गलियों और सड़कों पर पैदल या साइकिल से गुजरते इस संत-सदृश बुजुर्ग का दर्शन जिसे भी हुआ, उसकी स्मृति में वे आजीवन एक जीवंत छवि बन गए।