इस वर्ष अप्रैल तक 1.3 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक चिकित्सा उद्देश्यों के लिए आए भारत : केंद्र
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र ने गुरुवार को संसद को बताया कि इस वर्ष अप्रैल तक 1.3 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भारत आए।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र ने गुरुवार को संसद को बताया कि इस वर्ष अप्रैल तक 1.3 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भारत आए।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। सोंठ, जिसे आमतौर पर सूखी अदरक या ड्राई जिंजर पाउडर के नाम से जानते हैं, भारतीय रसोई और आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का एक अहम हिस्सा है। यह केवल एक मसाले के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी सदियों से इस्तेमाल में लाई जा रही है। जहां ताजा अदरक में ताजगी और तीखापन होता है, वहीं सोंठ में एक खास तरह की गरमाहट और औषधीय शक्ति होती है, जो इसे बिल्कुल अलग बनाती है। इसे अदरक को सुखाकर बनाया जाता है, लेकिन सुखाने की प्रक्रिया के दौरान इसके गुणों में कई बदलाव आते हैं। यही वजह है कि सोंठ और अदरक दोनों का शरीर पर प्रभाव अलग-अलग होता है। खासकर मानसून में, जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, तब सोंठ का सेवन शरीर को भीतर से मजबूती देता है।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। मिठास धीमे जहर के समान माना जाता है, जो धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, एक मीठापन ऐसा भी है, जो फायदेमंद है और सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने से नुकसान भी नहीं होता। जी हां! बात हो रही है गुड़ की, जो न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान है।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के सामंजस्य का प्रतीक है। हालांकि, योग की शुरुआत से पहले भी कुछ अभ्यास उसके महत्व को और भी बढ़ा सकते हैं। ऐसे ही एक अभ्यास का नाम 'प्रार्थना मुद्रा' है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उत्तम है बल्कि मानसिक शांति भी देता है।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव यानी स्ट्रेस हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ये तनाव गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे डिप्रेशन तक का रूप ले सकता है। ऐसे में इससे निजात पाने के लिए योग एक प्राकृतिक और प्रभावशाली विकल्प साबित हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में योग ने न केवल करोड़ों लोगों की सेहत में सुधार किया है, बल्कि यह मानसिक तनाव को भी कम कर खुशहाल जीवन दे रहा है।
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहत को बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। अनियमित दिनचर्या, गलत खान-पान और तनाव के चलते कई तरह की बीमारियां हमारे शरीर को जकड़ लेती हैं। 30-40 की उम्र में ही लोग शुगर, ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द, थायराइड और यूरिक एसिड जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। जब तक हम अपनी सेहत की देखभाल नहीं करेंगे, तब तक इन बीमारियों से छुटकारा पाना मुश्किल है। हमारे शरीर में कई तरह के तत्व होते हैं, जिनमें से कुछ जरूरी होते हैं और कुछ हानिकारक। ऐसा ही एक तत्व है यूरिक एसिड।
बुरहानपुर, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर और आनुवांशिक बीमारी से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को दी गई है, जो जिले में जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव, स्कूलों और छात्रावासों में जाकर महिलाओं, युवाओं, बच्चों और पुरुषों को इस बीमारी के प्रति जागरूक कर रही हैं।
नोएडा, 6 अगस्त (आईएएनएस)। आज के दौर में महिलाएं न केवल घर की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि प्रोफेशनल तौर पर भी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। ऐसे में मां बनना और साथ ही कामकाजी जीवन को संतुलित रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता, खासकर तब जब बात नवजात शिशु को स्तनपान कराने की हो। आम धारणा यही है कि कामकाजी महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग को लंबे समय तक जारी नहीं रख सकतीं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। अगर सही जानकारी, थोड़ी योजना और वर्कप्लेस पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो महिलाएं मातृत्व और करियर दोनों भूमिकाओं को बखूबी निभा सकती हैं।
नोएडा, 6 अगस्त (आईएएनएस)। ब्रेस्ट फीडिंग वीक जारी है। यह सप्ताह नई मां और नवजात शिशु से जुड़ी गतिविधियों और जानकारियों को प्रसारित करने से संबंधित है। मां के मन में कई सवाल भी होते हैं, जो शिशु की देखभाल और उसके पोषण से जुड़ी होती हैं। नई मां को हर बात का ख्याल रखना पड़ता है। अक्सर सवाल सामने आता है कि जन्म के कितनी देर बाद मां को स्तनपान शुरू कर देना चाहिए?
नोएडा, 6 अगस्त (आईएएनएस)। मां बनना एक खूबसूरत एहसास होता है, लेकिन इसके साथ कई जिम्मेदारियां भी जुड़ जाती हैं। नवजात शिशु की देखभाल, पोषण और उसकी जरूरतों को समझना मां के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन वह सबकुछ बेहद आसानी से संभाल लेती है। लेकिन मन में जिस चीज को लेकर सबसे ज्यादा दुविधा बनी रहती है, वह है सही समय पर दूध पिलाना।