वेरानियम क्लाउड और उसके एमडी पर सेबी का बड़ा एक्शन, फंड डायवर्जन और भ्रामक खुलासों के मामले में लगाया 7 साल का प्रतिबंध

वेरानियम क्लाउड और उसके एमडी पर सेबी का बड़ा एक्शन, फंड डायवर्जन और भ्रामक खुलासों के मामले में लगाया 7 साल का प्रतिबंध

मुंबई, 25 अगस्त (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) ने निवेशकों के धन के दुरुपयोग, वित्तीय आंकड़ों में कथित हेरफेर और भ्रामक खुलासों के मामले में वेरानियम क्लाउड लिमिटेड (वीसीएल) और उसके प्रबंध निदेशक हर्षवर्धन हनमंत साबले पर कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने दोनों को सात वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।

सेबी की जांच में पाया गया कि कंपनी ने कथित रूप से अपने डेटा सेंटर कारोबार को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, वित्तीय विवरणों में हेरफेर किया और निवेशकों से जुटाई गई राशि को प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं के लाभ के लिए स्थानांतरित किया।

नियामक ने हर्षवर्धन हनमंत साबले को 128.77 करोड़ रुपए के अवैध लाभ को 12 प्रतिशत ब्याज सहित वापस जमा कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, कंपनी को निवेशकों से जुटाए गए धन में से कथित तौर पर डायवर्ट किए गए 62.51 करोड़ रुपए की वसूली करने को भी कहा गया है।

सेबी की जांच मुख्य रूप से सितंबर 2022 में आए कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और उसके बाद जारी किए गए राइट्स इश्यू से संबंधित है।

कंपनी ने आईपीओ के जरिए 40.39 करोड़ रुपए जुटाए थे और दावा किया था कि इस राशि का उपयोग कंटेनर-आधारित एज डेटा सेंटर और डिजिटल लर्निंग सेंटर स्थापित करने के लिए किया जाएगा।

इसके बाद अगले वर्ष कंपनी ने राइट्स इश्यू के माध्यम से 48.45 करोड़ रुपए और जुटाए। सेबी के अनुसार, इस राशि का लगभग 89.83 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं की ओर मोड़ दिया गया, जिनमें से 32.73 करोड़ रुपए सीधे हर्षवर्धन साबले के व्यक्तिगत बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए।

जांच के दौरान सेबी ने कंपनी के डेटा सेंटर संबंधी दावों को भी भ्रामक पाया। वेरानियम क्लाउड ने दावा किया था कि उसने गोवा और सावंतवाड़ी में एज डेटा सेंटर शुरू किए हैं। हालांकि सेबी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा किए गए निरीक्षण में सावंतवाड़ी के पंजीकृत पते पर ऐसा कोई केंद्र नहीं मिला।

गोवा स्थित कथित डेटा सेंटर को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। सेबी ने पाया कि एक महीने की अवधि में उस सुविधा में केवल छह यूनिट बिजली की खपत हुई थी। नियामक के अनुसार, इतने कम बिजली उपयोग से यह संकेत मिलता है कि वहां कंपनी द्वारा बताए गए तकनीकी संचालन वास्तव में नहीं हो रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि परियोजनाओं से जुड़े मुख्य विक्रेता के पास आवश्यक स्थायी परिसंपत्तियां ही नहीं थीं।

सेबी ने कंपनी के खातों में कथित वित्तीय हेरफेर के भी प्रमाण मिलने की बात कही। जांच के अनुसार, कंपनी ने दो वित्तीय वर्षों में अमटेलफोन इन्कॉरपोरेटेड नामक एक संस्था से 594.32 करोड़ रुपए की बिक्री दर्शाई थी। हालांकि नियामक को इन लेनदेन के समर्थन में वास्तविक बैंक रसीदें नहीं मिलीं और इन्हें केवल लेखा प्रविष्टियां बताया गया।

इसके अलावा, कंपनी की अमेरिकी इकाई वेरानियम क्लाउड इंक को लेकर भी सवाल उठे। सेबी के अनुसार, इस सहायक कंपनी की पूंजी केवल 1,000 डॉलर थी और उसके पास कोई कर्मचारी भी नहीं था, फिर भी उसे एक ही तिमाही में 392.11 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करने वाली इकाई के रूप में दिखाया गया।

सेबी ने कहा कि कंपनी ने कई ऐसे कॉरपोरेट घोषणाएं भी जारी कीं, जिनसे उसके कारोबार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर निवेशकों के बीच अत्यधिक सकारात्मक धारणा बनी। इनमें फरवरी 2023 में फास्टवे ट्रांसमिशन्स प्राइवेट लिमिटेड के 2,683 करोड़ रुपए में संभावित अधिग्रहण की घोषणा भी शामिल थी।

नियामक के अनुसार, प्रस्तावित अधिग्रहण राशि कंपनी की कुल निवल संपत्ति से लगभग 20 गुना अधिक थी। इसके बाद कंपनी द्वारा घोषित राजस्व में 984 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई गई और उसके शेयर मूल्य में भी तेज उछाल आया। सेबी का आरोप है कि इस स्थिति का फायदा उठाकर प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं ने अपने शेयर ऊंचे दामों पर बेचे।

जांच में पाया गया कि प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं ने इस तरह 128.77 करोड़ रुपए से अधिक का अवैध लाभ कमाया, जबकि साधारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।

सेबी ने मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की है। हर्षवर्धन साबले पर 20.4 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जबकि कंपनी पर 1.3 करोड़ रुपए का दंड लगाया गया है।

बीएम ट्रेडर्स के स्वामी राज जगतानी पर भी कार्रवाई की गई है। सेबी के अनुसार, यह एक मुखौटा इकाई के रूप में कार्य कर रही थी, जिसे कंपनी और साबले से 138 करोड़ रुपए से अधिक प्राप्त हुए थे। जगतानी पर 10.1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें चार वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया गया है।

वहीं, कंपनी के कार्यकारी निदेशक विनायक वसंत जाधव, फहीम यूनुस शेख और मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुंदन राघवन पर 6-6 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

--आईएएनएस

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