हांसी, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की ओर से किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ किसानों को खेती के विभिन्न कार्यों में मिल रहा है। इन्हीं में एक योजना, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम), भी शामिल है, जिसके तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। सौर ऊर्जा से चलने वाले इन पंपों के कारण किसानों को बिजली और डीजल की बढ़ती लागत से राहत मिल रही है।
पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी कृषि लागत को कम करना है। योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किसानों को सोलर पंप स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे किसान बिजली कटौती या डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सिंचाई की व्यवस्था सुचारु रूप से कर पा रहे हैं। इसके अलावा, योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी उपलब्ध कराती है।
किसान अपनी बंजर या खाली जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर सकते हैं और उससे उत्पादित बिजली को ग्रिड में बेचकर आय प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह सौर ऊर्जा खेती के लिए सिंचाई का साधन उपलब्ध कराने के साथ किसानों के लिए कमाई का अतिरिक्त जरिया भी बन सकती है।
गढ़ी गांव के लाभार्थी किसान नरेश ने बताया कि पहले खेतों की सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर काफी खर्च करना पड़ता था। बिजली की उपलब्धता और डीजल की लागत दोनों ही खेती के खर्च को प्रभावित करते थे। उन्होंने बताया कि सोलर पंप लगने के बाद उन्हें हर महीने करीब 400 से 500 रुपए की बचत हो रही है। सौर ऊर्जा से पंप चलने के कारण बिजली पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है।
लाभार्थी किसान मुलायम सिंह ने बताया कि सोलर पंप लगने से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले बिजली के बिल और डीजल पर होने वाला खर्च अधिक था, जिससे फसल से होने वाली बचत कम हो जाती थी। अब सोलर पंप से सिंचाई करने पर लागत में कमी आई है और खेती पहले की तुलना में अधिक किफायती हो रही है।
किसान नरेंद्र ने बताया कि पहले डीजल और बिजली से पंप चलाकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती थी। बिजली की उपलब्धता पर निर्भरता और डीजल का खर्च दोनों परेशानी का कारण बनते थे। अब सोलर पंप से सीधे सिंचाई की सुविधा मिल रही है। किसान ने आगे कहा कि धूप निकलते ही पंप चलने लगता है और शाम को सूरज ढलने के साथ अपने आप बंद हो जाता है। इससे सिंचाई के लिए समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
किसानों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। बिजली कटौती के दौरान भी धूप उपलब्ध होने पर सोलर पंप से सिंचाई की जा सकती है। वहीं डीजल पर होने वाला खर्च कम होने से खेती की कुल लागत में भी कमी आती है। किसानों के मुताबिक, लंबे समय में यह व्यवस्था कृषि कार्यों को अधिक किफायती बनाने में मदद कर सकती है।
--आईएएनएस
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