'जलवायु पतन मानव-निर्मित, प्राकृतिक नहीं', उत्तर भारत में आए बाढ़ पर आचार्य प्रशांत
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। निरंतर बारिश और बाढ़ उत्तर भारत को तबाह कर रहे हैं। दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने इस विनाश को हमारी प्रगति की गलत परिभाषा का दर्पण बताया। हार्पर कॉलिन्स से उनकी आगामी पुस्तक 'ट्रस्ट विदाउट अपोलॉजी' के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में लोकार्पण से पहले आचार्य प्रशांत ने चेतावनी दी कि बाढ़ और भूस्खलन को प्राकृतिक आपदा कहना खतरनाक है, क्योंकि यह इन आपदाओं के मानव-निर्मित कारणों को नकारता है।