श्रमवीरों की आपबीती, "लगा था कि अब यहीं दफन हो जाएंगे, पानी की पाइप बनी थी लाइफ लाइन"
रांची, 30 नवंबर (आईएएनएस)। "उस दिन सुरंग गिरी तो लगा था, अब यहीं दफन हो जाएंगे। शुरुआत में आठ-दस घंटे तो इस चिंता में गुजरे कि पता नहीं अब कभी बाहर की रोशनी देख पाएंगे या फिर जिंदगी यहीं खत्म हो जाएगी। इसके बाद भूख-प्यास सताने लगी।