नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफीए) को देश की टेक्सटाइल, केमिकल और फार्मा-लिंक्ड इंडस्ट्री के साथ-साथ ज्वेलरी सेक्टर के लिए भी बड़ा अवसर माना जा रहा है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में मजबूत पहुंच देने के साथ-साथ भारत को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
दोधिया सिंथेटिक्स लिमिटेड के डायरेक्टर भद्रेश दोधिया ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यूरोपीय संघ सालाना करीब 250 अरब डॉलर का टेक्सटाइल आयात करता है, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी 10 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने बताया कि भारत के कई पड़ोसी देशों को पहले से ही ईयू में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला हुआ है, जिसके कारण उनका निर्यात 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
भद्रेश दोधिया के अनुसार, मौजूदा वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के चलते यूरोपीय देश अब नई और स्थिर सप्लाई चेन की तलाश में हैं और इस लिहाज से भारत एक भरोसेमंद, स्थिर और लॉन्ग-टर्म सप्लाई पार्टनर के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्य मंत्रालय द्वारा किए गए कई एफटीए भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बड़े अवसर लेकर आए हैं, लेकिन इसके साथ ही उद्योग को यूरोपीय मानकों के अनुसार खुद को तैयार भी करना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि दोधिया सिंथेटिक्स मुख्य रूप से प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और टेक्सटाइल रॉ मटेरियल प्रोडक्शन के क्षेत्र में काम करती है। फिलहाल, ड्यूटी के बावजूद यूरोप उनका लगभग 20 प्रतिशत एक्सपोर्ट मार्केट है। उन्होंने कहा कि एफटीए के बाद भारतीय कंपनियों को अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को अपग्रेड करने और यूरोपीय ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता व प्रतिस्पर्धी कीमत पर उत्पाद देने का मौका मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में यूरोप दुनिया में अग्रणी है और भारत के पास इस दिशा में बड़ी संभावनाएं हैं।
दोधिया ने बताया कि 'आत्मनिर्भर भारत' योजना के तहत यदि सरकार एमएसएमई सेक्टर को अपग्रेड करने में मदद करती है, तो यह ईयू एक्सपोर्ट के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता, मजबूत लोकतंत्र, युवा वर्कफोर्स और बड़ा घरेलू बाजार इसे वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि यूरोप के लिए सस्टेनेबिलिटी कोई विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ एफटीए से भारत की सर्कुलरिटी और सस्टेनेबिलिटी अप्रोच को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने इसे भारतीय उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक और यादगार अवसर बताया।
वहीं, एसीपीएल एक्सपोर्ट्स, सेज के डायरेक्टर रोहित गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है। इससे भारतीय जेम्स एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री को यूरोपीय बाजार में नई ताकत और भरोसा मिलेगा।
गुप्ता ने बताया कि ज्वेलरी सेक्टर एक लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्री है, खासकर हैंडमेड ज्वेलरी के क्षेत्र में। इस ट्रेड डील से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और एक्सपोर्ट बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह समझौता भारत के लिए बेहद जरूरी था और यह दोनों पक्षों के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के 27 देशों का यह संयुक्त बाजार भारत के लिए बड़ी संभावनाएं लेकर आया है। पोलैंड, रोमानिया और चेक रिपब्लिक जैसे देशों में पहले ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग होती थी, लेकिन अब भारत के पास सस्ती लेबर, उच्च क्रिएटिविटी और मजबूत कारीगरी के दम पर यूरोपीय बाजार के लिए एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का अवसर है।
उन्होंने बताया कि जयपुर जैसे शहर पहले से ही जेम कटिंग और ज्वेलरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। यदि यूरोप से कंपोनेंट्स को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलती है और भारत में वैल्यू एडिशन किया जाता है, तो इससे इटली, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क जैसे हाई-वैल्यू मार्केट्स में भारत को बड़ा फायदा मिलेगा।
--आईएएनएस
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