नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में औद्योगिक उत्पादन दिसंबर में दो साल से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अच्छा प्रदर्शन रहा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) की ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 6.7 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि देश की फैक्ट्रियों, खदानों और बिजली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में भारत की औद्योगिक गतिविधियां काफी मजबूत रहीं। आईआईपी साल-दर-साल आधार पर 7.8 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले दो साल से भी ज्यादा समय में सबसे तेज वृद्धि है। हालांकि नवंबर के आंकड़ों को संशोधित करने के बाद उसमें 7.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। इससे साफ है कि अलग-अलग सेक्टरों में उत्पादन तेजी से बढ़ा है।
इस बढ़त के पीछे मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली उत्पादन तीनों सेक्टरों का मजबूत प्रदर्शन रहा। दिसंबर में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन 8.1 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, माइनिंग सेक्टर में 6.8 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह दिखाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, पूंजीगत सामान और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बनी हुई है।
दिसंबर में आई इस तेजी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अहम योगदान रहा।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अंदर 23 में से 16 उद्योग समूहों में दिसंबर के दौरान सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई। इसमें कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन 34.9 प्रतिशत बढ़ा। मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का उत्पादन 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अन्य परिवहन उपकरणों में 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
दिसंबर में बेसिक मेटल्स का उत्पादन 12.7 प्रतिशत बढ़ा। इसमें एलॉय स्टील, एमएस स्लैब और स्टील पाइप व ट्यूब्स का योगदान रहा। फार्मास्युटिकल यानी दवा उद्योग में भी 10.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसमें वैक्सीन, पाचन से जुड़ी दवाइयां और विटामिन उत्पादों की अच्छी मांग रही।
उपयोग के आधार पर देखें तो इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े सामानों का उत्पादन दिसंबर में 12.1 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स यानी लंबे समय तक चलने वाले उपभोक्ता सामानों में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पता चलता है कि निवेश और लोगों की खरीदारी दोनों में तेजी बनी हुई है।
इस दौरान कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.1 प्रतिशत और इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 7.5 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, प्राइमरी गुड्स में 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के बीच कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन 3.9 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि साल के शुरुआती महीनों में कुछ उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन साल के अंत तक ग्रोथ की दिशा साफ तौर पर मजबूत दिखी। सरकार ने नवंबर 2025 के आंकड़ों में अंतिम संशोधन भी किया, जिससे औद्योगिक विकास की मजबूती की पुष्टि हुई।
वहीं, प्राइमरी गुड्स की ग्रोथ 2 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई। कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.1 प्रतिशत रहा, हालांकि यह नवंबर के 10.4 प्रतिशत से थोड़ा कम था। इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 12.1 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ बनी रही।
उपभोक्ता पक्ष पर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गई। वहीं, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स का उत्पादन 7.3 प्रतिशत से बढ़कर 8.3 प्रतिशत रहा। इससे साफ है कि लोगों की मांग अच्छी बनी हुई है।
केयरएज रेटिंग की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा के अनुसार, दिसंबर में 7.8 प्रतिशत की औद्योगिक वृद्धि दो साल से ज्यादा समय में सबसे तेज है। मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली-तीनों सेक्टरों में अच्छी बढ़त देखी गई है।
उनका कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े सामानों में सरकार के लगातार पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) की वजह से आईआईपी डेटा मजबूत बना हुआ है। साथ ही, उपभोक्ता सामानों की मांग भी अच्छी रही है। जीएसटी में सुधार, इनकम टैक्स में राहत, आरबीआई की पिछली ब्याज दर कटौती और महंगाई में नरमी जैसे कदम आगे भी खपत को सहारा देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि इन सबको देखते हुए आने वाला केंद्रीय बजट देश की आर्थिक रफ्तार तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार की कैपेक्स से जुड़ी नीतियां और उनका निजी निवेश पर असर औद्योगिक प्रदर्शन को प्रभावित करेगा। वहीं, अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक जोखिमों पर भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
--आईएएनएस
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