'भाषा से भावना व्यक्त करने के तरीके में बदलाव आता है', 'बा बा ब्लैक शीप' की मालवी मल्होत्रा

'भाषा से भावना व्यक्त करने के तरीके में बदलाव आता है', 'बा बा ब्लैक शीप' की रमा मालवी मल्होत्रा

मुंबई, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। तेलुगु क्राइम-कॉमेडी फिल्म 'बा बा ब्लैक शीप' में अभिनेत्री मालवी मल्होत्रा रमा के किरदार में नजर आ रही हैं। साउथ इंडस्ट्री में काम करने पर अभिनेत्री ने कहा कि भाषा इस बात को भी दिखाती है कि आप अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने कैसे व्यक्त करते हैं।

अभिनेत्री ने कहा, "हर इंडस्ट्री की काम करने की संस्कृति, लय और कहानी कहने की भाषा होती है और मेरे लिए इससे परिचित होना मददगार है। भाषा सिर्फ शब्दों या उच्चारण के बारे में नहीं है बल्कि, यह दिखाती है कि आप अपने मन की भावनाओं को कैसे व्यक्त करते हैं, सीन की लय कैसी होती है और आप अपने सह-कलाकार को कैसे सुनते हैं। आखिरकार, भावनाएं सार्वभौमिक होती हैं। चाहे आप हिंदी, तेलुगु, तमिल या मलयालम बोल रहे हों, किरदार की सच्चाई सामने आनी चाहिए। इस समझ ने मुझे और अधिक सहज और बहुमुखी कलाकार बना दिया है।"

अभिनेत्री ने रमा के किरदार के बारे में बताते हुए कहा, "रमा की अपनी अलग पहचान और इमोशनल सफर है। मुझे यह पसंद आया कि उसे सिर्फ हीरो के आसपास या उसकी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए नहीं लिखा गया। उसके कई पहलू हैं और जहां कुछ पहलू वास्तविकता के करीब थे, वहीं कुछ ने मुझे अपने व्यक्तित्व से बाहर ला दिया। जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित किया, वह था उसे एक असली इंसान जैसा महसूस कराने का अवसर, जिसमें उसके अपने विचार, कमजोरियां और ताकतें हों।"

अपनी भूमिका की तैयारी के बारे में बताते हुए मालवी ने कहा, "मैं आमतौर पर किरदार के बारे में ज्यादा कुछ तय नहीं करती, जब तक कि मैं यह न समझ लूं कि वह किस दुनिया से आती है, क्या चाहती है, किससे डरती है और किस तरह की प्रतिक्रिया देती है। मैंने स्पष्ट हावभाव बनाने के बजाय अपने अभिनय को सहज बनाने की कोशिश की थी। मेरी थिएटर ट्रेनिंग ने मुझे सिखाया है कि छोटी-छोटी बातें किसी किरदार को विश्वसनीय बना सकती हैं, इसलिए मैंने उसके आंतरिक जीवन पर अधिक ध्यान दिया और हावभाव को स्वाभाविक रूप से उभरने दिया।"

उन्होंने कहा, "मुझे तुरंत जिस चीज ने आकर्षित किया था, वह कहानी और उसकी दुनिया थी। मैं ऐसे प्रोजेक्ट खोजती हूं, जहां पात्रों की अपनी यात्राएं हों और कुछ सार्थक योगदान हो। जब मैंने पटकथा पढ़ी, तो मुझे लगा कि पात्र और उनकी भावनाएं कहानी को चला रही हैं। मैं सिर्फ पैमाने या ग्लैमर के कारण किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने से ज्यादा अच्छी कहानी का हिस्सा बनना पसंद करती हूं।"

--आईएएनएस

एनएस/एबीएम