युवा सोच को मिली राष्ट्रीय पहचान: 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में पीएम मोदी के समक्ष रखे गए विचार बजट में हुए शामिल

युवा सोच को मिली राष्ट्रीय पहचान: 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में पीएम मोदी के समक्ष रखे गए विचार बजट में हुए शामिल

नई दिल्ली, 6 फरवरी (आईएएनएस)। देश के युवाओं के विचार अब सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नीति और बजट का हिस्सा भी बन रहे हैं। 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' इसका बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

इस मंच पर देशभर से आए करीब 3,000 चयनित युवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने विचार रखे, जिन्हें न केवल गंभीरता से सुना गया, बल्कि कई सुझावों को केंद्रीय बजट में भी शामिल किया गया।

पश्चिम बंगाल से प्रतिभागी और प्रस्तुतकर्ता रितम भट्टाचार्य ने बताया कि प्रधानमंत्री के सामने देश के युवाओं की ओर से विचार रखने का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक-एक बिंदु को ध्यान से सुना और फिर अपने विचार साझा किए। इस दौरान विभागवार और कैबिनेट के मंत्रियों ने भी सुझावों पर अपनी राय रखी।

रितम के अनुसार, जब रविवार सुबह बजट देखा गया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' का जिक्र करते हुए बताया कि युवाओं के कई विचार बजट में शामिल किए गए हैं, तो गर्व की अनुभूति हुई।

दिल्ली से प्रतिभागी दिशा गोयल ने कहा कि यह अनुभव युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि पहली बार ऐसा मंच मिला, जहां युवाओं की बात न केवल सुनी गई, बल्कि उस पर काम भी हुआ। दिशा ने कहा कि इस साल के बजट में युवाओं के सुझावों को जगह और बजट आवंटन मिला, जिससे यह साबित हुआ कि 'सबका साथ, सबका विकास' अब केवल नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन रहा है।

दिशा गोयल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों की सराहना की और कई अहम सुझाव दिए। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर सभी राजनीतिक दलों तक पहुंचना और इसकी जानकारी देना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की बात कही और सुझाव दिया कि जैसे बच्चों को स्कूल जाने पर उत्साहित किया जाता है, वैसे ही पहली बार वोट डालने वालों का भी स्वागत होना चाहिए।

राजस्थान से प्रतिभागी दीपक शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत में युवा सबसे बड़ी ताकत हैं, क्योंकि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। इस युवा शक्ति को 'डेमोक्रेटिक डिविडेंड' में बदलने के लिए सही दिशा देना बेहद जरूरी है। दीपक ने यह भी साझा किया कि 'ऑरेंज इकोनॉमी' पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन और वैदिक संस्कृति, रामायण, महाभारत और अन्य ग्रंथों की वैश्विक संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर इन पर आधारित कंटेंट या यहां तक कि हनुमान जी पर एक गेम भी बनाया जाए, तो वह दुनिया भर में छा सकता है।

दीपक शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में करीब 3,000 युवा मौजूद थे और चार दिन के प्रशिक्षण के बाद जब प्रधानमंत्री मंच पर पहुंचे, तो माहौल में जबरदस्त ऊर्जा भर गई। उन्होंने यह भी बताया कि पहली बार वोट देने वालों के स्वागत का सुझाव प्रधानमंत्री को पसंद आया और 25 जनवरी को देशभर में पहली बार वोट देने वाले युवाओं का मिठाइयों और मालाओं से स्वागत किया गया।

उत्तराखंड से प्रतिभागी अनघ सक्सेना ने बताया कि राज्य से करीब 70-75 युवाओं की टीम इस कार्यक्रम में शामिल हुई, जिन्होंने अलग-अलग विषयों पर भागीदारी की और राष्ट्रीय युवा महोत्सव समेत अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।

पंजाब से दीया शर्मा ने बताया कि यह संवाद मंत्रालय युवा कार्य एवं खेल द्वारा आयोजित किया गया था। इसकी प्रक्रिया कई चरणों में हुई। पहले चरण में देशभर के करीब 50 लाख युवाओं ने क्विज में भाग लिया, फिर निबंध प्रतियोगिता, राज्य स्तर पर पीपीटी चैलेंज और इंटरव्यू के बाद 3,000 युवाओं का चयन हुआ। 9 से 12 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में अंतिम चरण आयोजित हुआ, जहां 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से संवाद किया।

गोवा से शिवांग शिरोडकर ने कहा कि प्रधानमंत्री के सामने विचार रखने का मौका मिलना किसी सपने के सच होने जैसा था। मंच पर पहुंचते ही उन्हें महसूस हुआ कि यह वह जगह है जहां वे देश के युवाओं की सोच सीधे देश के नेतृत्व तक पहुंचा सकते हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस