27 जगहों के नामकरण से भारत ने चीन को दिया कड़ा डिप्लोमैटिक मैसेज: वाइल अव्वाद

विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद बोले- 27 जगहों के नामकरण से भारत ने चीन को दिया कड़ा डिप्लोमैटिक मैसेज

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। विदेशी मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ अरुणाचल प्रदेश में भारत द्वारा 27 जगहों और ज्योग्राफिकल फीचर्स के नाम बताने, चीन के एतराज, भारत-चीन सीमा पर शांति, भारत-बांग्लादेश संबंधों और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को लेकर खास बातचीत की।

भारत द्वारा 27 जगहों और ज्योग्राफिकल फीचर्स के नाम बताने को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, "मुझे लगता है कि यह भारत की तरफ से चीन को एक डिप्लोमैटिक मैसेज से कहीं ज्यादा है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक जरूरी हिस्सा है और भारत अपनी किसी भी अखंडता और चीन के साथ किसी भी इलाके के विवाद से कोई समझौता नहीं करेगा, खासकर जब बात अरुणाचल प्रदेश की हो।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह डिप्लोमैटिक तनाव होना चाहिए, क्योंकि इस तरह की दिक्कत एशिया के दो बड़े देशों के बीच संबंध को खराब नहीं कर सकती। अगर वे अपनी समस्या सुलझाना चाहते हैं तो उन्हें इसे बिना किसी उलझन के सुलझाना चाहिए, खासकर जब हम जानते हैं कि पिछले सात दशकों से, हमने सीमा पर शांति देखी है, व्हाइट वेपन (बिना बारूद वाले हथियार) के साथ कुछ झड़पों को छोड़कर, लेकिन इसके अलावा, एशिया के दो बड़े देशों के बीच हमेशा स्थिरता रहा है।''

वाइल अव्वाद ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से कहा, "मुझे लगता है कि दोनों देशों को अपनी बातचीत जारी रखनी चाहिए, दोनों तरफ की सेनाओं के बीच सीमा पर मीटिंग जारी रखनी चाहिए और इससे सभी बाकी मुद्दों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी। हमने दशकों से देखा है कि दोनों देशों ने कई मुद्दों से निपटने में समझदारी और पॉलिटिकल समझदारी दिखाई है, खासकर जब हिमालय बॉर्डर और दोनों देशों के बीच विवाद की बात आती है।''

भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत होनी चाहिए। बांग्लादेश हिन्दुस्तान के करीब भी है और दोस्त भी है। शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध थे, लेकिन नई सरकार में ज्यादा टेंशन था। साउथ एशिया के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत होनी चाहिए और समस्या का समाधान होना चाहिए। जो लोग दोनों देशों के बीच दोस्ती होते हुए नहीं देखना चाहते, यह बहुत ज्यादा खतरनाक है। बांग्लादेश की हालत अभी तक बहुत अच्छी नहीं है। देश में स्थिरता नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत के साथ दोस्ती बढ़ाना चाहते हैं तो यह बांग्लादेश के लिए भी अच्छा होगा। यह दोनों ही देशों के लिए जीत की स्थिति होगी।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर अव्वाद ने कहा कि उन्होंने भारत के अंदर कोई आपराधिक काम नहीं किया है, वह कानूनी तौर पर रह रही हैं। अगर हसीना ने कोई अपराध किया होता भारत के अंदर तो उन पर कार्रवाई की जा सकती थी। वो खुद कह रही हैं कि वो वहां जाना चाहती हैं। उनके पास पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज नहीं हैं। वो कैसे वापस जाएंगी? इसलिए दोनों देशों को बातचीत के जरिए इस मामले का हल निकालना चाहिए।

--आईएएनएस

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