सूरत/वडोदरा, 8 मई (आईएएनएस)। सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'संस्कृति पर्व' को लेकर गुजरात में उत्साह का माहौल है। खासतौर पर 11 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ आगमन को लेकर साधु-संतों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
सूरत में भारत सेवाश्रम संघ के संयुक्त सचिव और सूरत शाखा के अध्यक्ष स्वामी अंबरीशानंद ने प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि आस्था को कोई शक्ति मिटा नहीं सकती।
स्वामी अंबरीशानंद ने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया लेख का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर को 17 बार लूटा गया और तोड़ा गया, लेकिन हर बार भक्तों की आस्था ने उसे फिर से खड़ा कर दिया।
उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में सोमनाथ मंदिर अत्यंत समृद्ध और भव्य था। देशभर के श्रद्धालु अपनी बहुमूल्य वस्तुएं, सोना-चांदी और रत्न भगवान को अर्पित करते थे। इसी कारण मंदिर में अपार संपत्ति मौजूद थी और इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी। स्वामी अंबरीशानंद ने कहा कि द्वारका से प्रभास पाटन तक का पूरा क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण के राज्य से जुड़ा हुआ था, इसलिए सोमनाथ मंदिर पौराणिक काल से ही अत्यंत प्रसिद्ध रहा है।
उन्होंने कहा कि जब देश की शासन व्यवस्था कमजोर हुई और विदेशी आक्रमण बढ़ने लगे, तब महमूद गजनवी ने अफगानिस्तान के गजनी से आकर सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। उन्होंने दावा किया कि मंदिर को 17 बार लूटा गया और वहां से बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और कीमती वस्तुएं लूटकर ले जाई गईं।
स्वामी अंबरीशानंद ने स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1947 में देश आजाद होने के बाद सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और पुनर्स्थापना का संकल्प लिया था। उसी संकल्प के आधार पर मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।
उन्होंने बताया कि सोमनाथ ट्रस्ट की परंपरा के अनुसार गुजरात का मुख्यमंत्री ट्रस्ट से जुड़ा रहता है। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब भी वह सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे और आज भी मंदिर से उनका गहरा जुड़ाव है।
स्वामी अंबरीशानंद ने प्रधानमंत्री मोदी को 'परम राष्ट्रभक्त' और 'संस्कृति प्रेमी' बताते हुए कहा कि व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उनका सोमनाथ आना इस बात का संदेश है कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक गौरव सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि 8 मई से 11 मई तक चल रहे पुनर्प्रतिष्ठा के 'संस्कृति पर्व' में प्रधानमंत्री की भागीदारी पूरे गुजरात और देश के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आचरण और संस्कृति प्रेम से देश की 140 करोड़ जनता को प्रेरणा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने अपने लेख में सही लिखा है कि आस्था और संस्कृति के प्रतीकों को कितनी भी बार तोड़ा जाए, लेकिन जब श्रद्धा मजबूत होती है तो भक्त उन्हें फिर से खड़ा कर देते हैं।
वहीं वडोदरा के इतिहासकार और कंजर्वेटिव एक्सपर्ट चंद्रशेखर पाटिल ने भी प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ दौरे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति, पुनर्जागरण और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है।
चंद्रशेखर पाटिल ने कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास बेहद प्रेरणादायक रहा है, जिसने कई आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद अपनी पहचान और आस्था को कायम रखा। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 1029 साल पहले मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, लेकिन इसके बावजूद मंदिर की आस्था कभी खत्म नहीं हुई।
--आईएएनएस
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