नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। बाजार विशेषज्ञों ने रविवार को कहा कि भारतीय शेयर बाजार आगामी सप्ताह में सतर्कतापूर्ण दायरे में कारोबार कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर प्रमुख तकनीकी स्तरों पर बनी रहेगी।
पिछले सप्ताह भारतीय बाजार दबाव में रहे, हालांकि शुक्रवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 76,515.43 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया था, लेकिन क्लोजिंग ऑक्शन सत्र में अधिकांश बढ़त गंवा बैठा।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का स्तर निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा मजबूत बाधा माना जा रहा है। यदि सेंसेक्स 78,000 के ऊपर टिकाऊ बढ़त दर्ज करने में सफल रहता है, तो इसमें तेजी का नया चरण शुरू हो सकता है और सूचकांक 78,500 से 78,800 की ओर बढ़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सेंसेक्स अभी भी सुधार और समेकन के दौर में है। ऐसे में यदि मौजूदा स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर पड़ता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है और सूचकांक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है।
दूसरी ओर, निफ्टी के लिए 23,800 सबसे महत्वपूर्ण समर्थन स्तर (सपोर्ट लेवल) माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर के ऊपर बने रहना सूचकांक के लिए जरूरी होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के स्तर तक जा सकता है।
ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का स्तर निफ्टी के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक निफ्टी इस दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है और निवेशक हर उछाल पर मुनाफावसूली कर सकते हैं।
पिछले सप्ताह बाजार की कमजोरी का प्रमुख कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया। ऊंचे तेल मूल्य भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई और कॉर्पोरेट लागत दोनों पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की धारणा को कमजोर कर रही है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने का काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेश प्रवाह और रुपये की चाल पर रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिलती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं प्रतिकूल वैश्विक संकेतों की स्थिति में निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है।
--आईएएनएस
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