100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलना बहुत खुशी और गर्व का एहसास: श्रेयस गोपाल

100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलना बहुत खुशी और गर्व का एहसास: श्रेयस गोपाल

चेन्नई, 6 सितंबर (आईएएनएस)। साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में श्रेयस गोपाल अपने घरेलू करियर का 100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलने मैदान पर उतरे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को 'अविश्वसनीय' बताया है।

चेन्नई, 6 सितंबर (आईएएनएस)। साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में श्रेयस गोपाल अपने घरेलू करियर का 100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलने मैदान पर उतरे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि को 'अविश्वसनीय' बताया है।

घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए लंबे समय से अहम भूमिका निभाने वाले श्रेयस गोपाल ने अपने 100वें फर्स्ट-क्लास मैच के मौके को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए बहुत खुशी और गर्व की बात है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शेयर किए गए वीडियो में श्रेयस ने कहा, "100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलना वाकई अविश्वसनीय है, और दलीप ट्रॉफी फाइनल इसे और भी खास बनाता है। बचपन में आप अपने राज्य के लिए कुछ मैच खेलने का सपना तो देखते हैं, लेकिन 100वां मैच खेलने का सपना शायद ही देखते हैं, इसलिए यह एक खास एहसास है।"

2013 में अपने फर्स्ट-क्लास डेब्यू के बाद से श्रेयस ने अपने करियर में सफलता और चुनौतियां दोनों देखी हैं। "पिछले कुछ वर्षों में कई यादें बनी हैं - अच्छी, कड़वी, निराशाजनक, खुशी भरी - यह मिली-जुली भावना है, लेकिन यहां खड़े होकर अपना 100वां मैच खेलना बहुत खुशी और गर्व का एहसास है। जैसा कि मैंने कहा, पिछले कुछ साल काफी मेहनत भरे रहे हैं। भारतीय विकेटों पर खेलना मुश्किल हालात में खेलने जैसा होता है, और वहां कुछ हासिल करने के लिए आपको वाकई बहुत मेहनत करनी पड़ती है।"

श्रेयस ने कर्नाटक के साथ अपने करियर की शुरुआत की और 2013-14 सीज़न में टीम को रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई। उस सीजन में उन्होंने 22 विकेट लिए थे। इसके बाद में वह 2023-24 सीजन के लिए केरल चले गए, लेकिन फिर कर्नाटक लौट आए और 2024-25 घरेलू सीजन में टीम को विजय हजारे ट्रॉफी जिताने में मदद की।

श्रेयस ने कहा, "जब आप फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में आते हैं, तो बचपन में मुझे एक बात बताई गई थी कि फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में इतने वर्षों तक टिके रहना कोई आसान काम नहीं है; यह सबसे मुश्किल काम होगा। अब जब मैं इस मुकाम पर हूं, तो समझता हूं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। यह सफर चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन साथ ही बहुत संतोषजनक भी रहा है।"

स्पिन गेंदबाज ने आगे कहा, "इसने मुझे सबसे बड़ी बात जो सिखाई है, वह है अनुशासन और दृढ़ता। इनके बिना आप अधिक मैच नहीं खेल पाएंगे। मैं इसे (100वें मैच के पड़ाव को) अपने परिवार, माता-पिता और पत्नी, और निश्चित रूप से अपने कुछ बहुत करीबी दोस्तों, और उन फैंस व लोगों को समर्पित करना चाहता हूं जिन्होंने मेरे पूरे सफर में मेरा साथ दिया है।"

--आईएएनएस

एसएम/डीकेपी