सनातन धर्म को बचाना है तो जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकना होगा : पूर्व डीजीपी वैद

सनातन धर्म को बचाना है तो जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकना होगा: पूर्व डीजीपी

जम्मू, 9 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा है कि भारत को अगर अपनी संस्कृति बचानी है तो जनसांख्यिकीय बदलाव को चेक करना बेहद जरूरी है। सनातन धर्म को बचाना है तो जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकना ही होगा।

जम्मू में आईएएनएस से बात करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि यह भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। देश की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश की जा रही है। इनमें अधिकांश मामलों में विदेशी फंडिंग और बाहरी तत्वों की भूमिका है। चाहे घुसपैठ की बात हो या बांग्लादेशी नागरिकों की, अलग-अलग अनुमान लगाए जाते हैं। किसी के अनुसार भारत में 5 करोड़ और किसी के अनुसार 3 करोड़ बांग्लादेशी हैं। इसकी सटीक जानकारी होनी चाहिए कि यदि वे हैं, तो कहां हैं।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और बिहार-झारखंड के कुछ इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिले हैं। कुछ गतिविधियां विदेशी फंडिंग से भी संचालित हो रही हैं। इसी वजह से गृह मंत्रालय ने विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जानने की व्यवस्था की है कि पैसा कहां से आया, किस काम में खर्च हुआ और उसका अंतिम उपयोगकर्ता कौन है।

पूर्व डीजीपी ने कहा कि सरकार ने एक आयोग का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। आयोग में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी भी सदस्य हैं। मेरा मानना है कि इस आयोग को गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए कि यदि कहीं जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है तो वह कहां और कितनी मात्रा में हुआ है। जिन इलाकों में इसकी आशंका है, उनका विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि खासकर जम्मू क्षेत्र को लेकर एक मजबूत भावना है। मेरे पास ऐसी कोई अध्ययन रिपोर्ट नहीं है, जिसे मैं उद्धृत कर सकूं। लेकिन, पिछले 30-40 वर्षों में जो बदलाव दिखाई दिए हैं, उनसे यह महसूस होता है कि जम्मू क्षेत्र में आर्टिफिशियल तरीके से जनसांख्यिकीय बदलाव लाने की कोशिश हुई हैं। जम्मू क्षेत्र के मूल चरित्र को बदलने का प्रयास किया गया है। यहां अवैध तरीके से लोगों को बसाया गया है। इनमें रोहिंग्या भी हैं, कुछ बांग्लादेशी भी हैं और अन्य प्रकार के बदलाव भी देखने को मिले हैं।

सीएम उमर अब्दुल्ला के बयान पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि मुझे लगता है कि उमर अब्दुल्ला का बयान अच्छा है और उसका स्वागत किया जाना चाहिए। भारत की पाकिस्तान से केवल एक मांग है कि वह आतंकवाद बंद करे। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण हजारों भारतीय मारे गए हैं। मुंबई हमला, संसद हमला, दिल्ली और मुंबई के सीरियल ब्लास्ट जैसे कई आतंकी हमले हुए हैं। भारत यही कहता है कि आतंकवाद बंद होगा, तभी अन्य मुद्दों पर आगे बढ़ा जा सकता है। हम यही कह रहे हैं कि हम पानी तभी देंगे, पहले आतंकवाद बंद करो।

उन्होंने पीओजेके का जिक्र करते हुए कहा कि पीओजेके के लोग पाकिस्तान सेना की ज्यादतियों से तंग आ चुके हैं। उनकी उचित मांगों को सुनने के बजाय गोलियों से जवाब दिया जाता है। कई लोग मारे गए और घायल हुए। बलूचिस्तान में भी लोगों का रात में अपहरण कर लिया जाता है और शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाने वाली महिला के साथ भी गलत बर्ताव किया जाता है।

उन्होंने इसी बीच, ईरान का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने आश्वासन दिया था कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद 60 दिनों तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा, लेकिन उसके बाद आईआरजीसी द्वारा तीन टैंकरों पर हमला किया गया। जब ईरान ने स्वयं कहा था कि 60 दिनों तक आवाजाही सामान्य रहेगी और उसके बाद कोई नई व्यवस्था बनाई जाएगी, तो ऐसी घटनाओं से स्थिति और बिगड़ती है। इसके बाद अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की। ऐसे हालात में मुझे लगता है कि स्थिति बेहतर होने के बजाय और खराब होगी।

--आईएएनएस

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