राम मंदिर ट्रस्ट को अब तक मिली 3,200 करोड़ रुपये की आय, खर्च के बाद शेष हैं 1,800 करोड़ : स्वामी गोविंद देव गिरि

राम मंदिर ट्रस्ट को अब तक मिली 3,200 करोड़ की आय, खर्च के बाद भी बचे हैं 1,800 करोड़ रुपए: स्वामी गोविंद देव गिरि

अयोध्या, 7 जुलाई (आईएएनएस)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हालिया विवादों के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि कार्यप्रणाली में सुधार करना आवश्यक है।

मंदिर प्रबंधक के पद से जुड़े सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने आईएएनएस से कहा कि गोपाल राव को पहले ही सूचित कर दिया गया है कि अब वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि व्यवस्थाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में अधिक प्रभावी प्रणाली लागू की जाएगी।

दान और आय से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से अब तक ट्रस्ट को लगभग 3,200 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च के बाद भी ट्रस्ट के पास करीब 1,800 करोड़ रुपये शेष हैं। उन्होंने कहा कि दान को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति बनी थी, उसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि हाल की घटनाओं के बाद लोगों के बीच कुछ भ्रम पैदा हुआ था, लेकिन अब उसे दूर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और ट्रस्ट पहले की तरह बेहतर ढंग से काम करेगा।

ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर किए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मामला केवल पद छोड़ने तक सीमित नहीं है। स्थायी समाधान कार्यप्रणाली में सुधार है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

चंपत राय के बारे में पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनका चंपत राय से लंबे समय का जुड़ाव रहा है और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई उनके काम करने के तरीके को लेकर हुई है, न कि उनके चरित्र को लेकर।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चंपत राय पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाता है, तो वह इसे सही नहीं मानते।

स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि चंपत राय को कार्यशैली में सुधार के लिए कई बार सलाह दी गई थी। उनके अनुसार, कुछ कमियां उनकी कार्यशैली का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें उनके चरित्र से जोड़ना उचित नहीं है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पहले उठाए गए चढ़ावा चोरी के मुद्दे और कथित आरोपियों के संपर्कों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कोई टिप्पणी करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में लिए गए सभी फैसलों की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। किसी भी संस्था में कार्यप्रणाली की समीक्षा एक सतत प्रक्रिया होती है और इससे व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।

--आईएएनएस

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