राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संत समाज में गुस्सा, बोले- मास्टरमाइंड तक पहुंचना जरूरी

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संत समाज में गुस्सा, बोले- मास्टरमाइंड तक पहुंचना जरूरी

अयोध्या, 26 जून (आईएएनएस)। राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और दर्ज एफआईआर को लेकर धार्मिक प्रमुखों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विभिन्न संतों और आध्यात्मिक नेताओं ने इस पूरे प्रकरण पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष और तेजी से जांच की मांग की है।

वरुण दास महाराज ने कहा कि यह घटना समस्त राम भक्तों के हृदय को आहत करने वाली है। इसकी गंभीरता को देखते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज होना जरूरी था। पहले जांच की बात चल रही थी, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हो पा रही थी, जबकि पूरे मामले में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी। अंततः ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें विभिन्न धाराओं के तहत आठ लोगों के नाम शामिल हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि जांच तेजी से पूरी होगी और सभी तथ्यों को सामने लाकर मामले का निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सत्य के मार्ग पर चलने के प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान केवल भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि आस्था और भावनाओं का प्रतीक है। इसलिए यदि किसी भी स्तर पर उसके दुरुपयोग की आशंका है तो उसका पूरी तरह से खुलासा होना चाहिए।

अनिरुद्ध देव दास ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विषय पहले से ही चर्चा में था और कई लोग इसे अफवाह बताते रहे, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चंदे और दान से जुड़ी राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि यह केवल धन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या चोरी की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से न केवल संस्थाओं की छवि प्रभावित होती है, बल्कि पूरे सनातन समाज की भावना आहत होती है। इसलिए किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

नरेंद्राचार्य महाराज ने विश्व हिंदू परिषद द्वारा उठाए गए सवालों की सराहना करते हुए कहा कि यह उचित कदम है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया कि उन्होंने जांच के लिए टीम गठित की। उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी कुछ बड़े लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं और पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती कार्रवाई में केवल छोटे स्तर के लोगों पर ध्यान दिया गया है, जबकि असली जिम्मेदारों तक पहुंचना आवश्यक है। जब तक पूरे नेटवर्क की जांच नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं पूरी तरह रुक नहीं सकतीं।

वहीं, महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अयोध्या के संत और भक्त लगातार एफआईआर की मांग करते रहे, लेकिन शुरुआत में कार्रवाई में देरी हुई। यह एफआईआर तब दर्ज हुई, जब विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने दबाव बनाया। हालांकि, उन्होंने इसे देर से सही, लेकिन उचित कदम बताया।

उन्होंने कहा कि अब केवल छोटे स्तर के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई से बात नहीं बनेगी, बल्कि इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड की पहचान जरूरी है। यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जांच बेहद गंभीरता से की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक भक्तों के मन में शंका बनी रहेगी।

--आईएएनएस

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