नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात मई में पहली बार 12 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में व्यवधान के बावजूद इंजीनियरिंग निर्यात में साल-दर-साल 24.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह जानकारी शुक्रवार को इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) इंडिया ने दी।
सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात 12.31 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी महीने 9.89 अरब डॉलर था।
ईईपीसी इंडिया ने बताया कि मई में भारत के कुल माल निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में इंजीनियरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 27.2 प्रतिशत रही।
निर्यात में यह मजबूत प्रदर्शन मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मशीनरी और उपकरण, जहाज एवं तैरते ढांचे, मोटर वाहन तथा लोहा-इस्पात उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी के कारण दर्ज किया गया।
मई में इंजीनियरिंग उत्पादों के 34 में से 28 श्रेणियों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि वैश्विक कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को फिर से व्यवस्थित कर रही हैं ताकि किसी एक देश, विशेषकर चीन, पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके। इससे भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में वाणिज्य मंत्रालय से तेज नीति राहत, सस्ता व्यापार वित्त और बेहतर जोखिम सुरक्षा का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
चड्ढा ने कहा कि सरकार के उचित मार्गदर्शन से भारत 2030 तक 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, मई में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए उत्तर अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा, जहां कुल निर्यात का 19.3 प्रतिशत गया। इसके बाद पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र की हिस्सेदारी 16.7 प्रतिशत तथा यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 15.2 प्रतिशत रही।
पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट के बावजूद मई में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं अप्रैल-मई की अवधि में इस क्षेत्र को होने वाले निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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