आगरा, 14 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को आगरा की प्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किए जाने के बाद शहर के पिएत्रा ड्यूरा (पच्चीकारी) शिल्प से जुड़े कारीगरों और हस्तशिल्प समुदाय में खुशी का माहौल है। सदियों पुरानी इस कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कारीगरों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस कदम से न केवल आगरा की ऐतिहासिक पच्चीकारी कला का गौरव बढ़ेगा, बल्कि देश-विदेश के बाजारों में इसकी मांग भी बढ़ेगी, जिससे स्थानीय कारीगरों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी के अध्यक्ष हाजी ताहिर उद्दीन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे आगरा के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर जनरल को आगरा की प्रसिद्ध मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया जाना पूरे शहर और इस शिल्प से जुड़े परिवारों के लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं कि उनकी पीढ़ियां इस कला से जुड़ी रही हैं। उनके अनुसार इस शिल्प को पिएत्रा ड्यूरा कहा जाता है, जिसे आगरा के कारीगर सदियों से तैयार करते आ रहे हैं और इसकी कलाकृतियां देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भेजी जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है, जिसे उनके बाबा-दादा भी करते थे और आज भी उनका परिवार इसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
हाजी ताहिर उद्दीन ने कहा कि मार्बल इनले वर्क बॉक्स जैसे हस्तशिल्प की पहचान समय के साथ कुछ धुंधली पड़ गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा इसे एक प्रतिष्ठित राजनयिक उपहार के रूप में प्रस्तुत किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता और पहचान निश्चित रूप से बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे इस पारंपरिक उद्योग को नया जीवन मिलेगा और कारोबार में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी।
वहीं, पच्चीकारी शिल्प से जुड़े अनुभवी कारीगर शमसुद्दीन ने भी प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि वे पिछले 45 वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि मार्बल इनले वर्क बॉक्स और अन्य पच्चीकारी उत्पादों को खरीदने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इस शिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से भारतीय कारीगरों को नई पहचान मिलेगी और वैश्विक बाजार में उनके लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने इसे आगरा की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत के लिए गर्व का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई के बीच 500 रुपए की दैनिक आय से परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि कारीगरों की मेहनत के अनुरूप उन्हें कम से कम एक हजार रुपए प्रतिदिन की आमदनी सुनिश्चित होनी चाहिए।
--आईएएनएस
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