नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को कहा कि स्वच्छ ऊर्जा में नीदरलैंड के साथ साझेदारी से भारत को ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने में मदद मिलेगी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा से भारत-नीदरलैंड साझेदारी को गति मिलेगी। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन में सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा इनोवेशन को मजबूती मिलेगी, निवेश बढ़ेगा, नए आर्थिक अवसर पैदा होंगे और भारत ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र के रूप में उभरने में सहायक होगा। यह साझेदारी सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करती है।
इसके साथ केंद्रीय मंत्री ने पीएम की यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौतों के बारे में भी बताया है।
केंद्रीय मंत्री द्वारा शेयर किए गए पोस्टर में बताया गया कि भारत और नीदरलैंड ने नवीकरणीय ऊर्जा ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप बनाने का निर्णय लिया है। इससे भारत में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के लिए टेक्नोलॉजी, विशेषज्ञता और फाइनेंस हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे ग्रीन एनर्जी में भारतीय उद्योग, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों के लिए अधिक अवसर पैदा होंगे।
दूसरा समझौता ग्रीन हाइड्रोजन पर रोडमैप तैयार करना है। इससे यूरोप में भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात के लिए बड़ा बाजार तैयार होगा। साथ ही, स्टोरेज और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश एवं टेक्नोलॉजी आएगी। साथ ही, ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
तीसरा समझौता नीति आयोग और नीदरलैंड ऑन एनर्जी सेक्टर एंड एनर्जी ट्रांजिशन प्रोजेक्ट्स के बीच समझौता होना है। इससे दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होगी और एनर्जी सिक्योरिटी को भा बढ़ावा मिलेगा।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट ग्रीन एनर्जी क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। मौजूदा समय में देश की ग्रीन एनर्जी क्षमता 250 गीगावाट से भी अधिक है।
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