नैनीताल में स्वयं सहायता समूहों से बदली महिलाओं की जिंदगी, स्वरोजगार से बढ़ी आत्मनिर्भरता

नैनीताल में स्वयं सहायता समूहों से बदली महिलाओं की जिंदगी, स्वरोजगार से बढ़ी आत्मनिर्भरता

नैनीताल, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकार की स्वरोजगार योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर नैनीताल जिले की ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज स्थानीय उत्पाद तैयार करने, कारोबार चलाने, बैंक से वित्तीय सहायता लेने और दूसरी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं। नमक, मसाले, शहद, अचार, राजमा, पहाड़ी उत्पाद, मिलेट्स और स्थानीय जड़ी-बूटियों से जुड़े काम के जरिए महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं।

ताकुला ग्राम सभा की निर्मला जोशी, निगलाट गांव की दीपिका मेहरा और घुगु सिगड़ी गांव की पूजा बिष्ट ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद उनके जीवन में कई बदलाव आए हैं। महिलाओं ने कहा कि समूहों के माध्यम से उन्हें रोजगार, वित्तीय सहायता और अपने हुनर को आगे बढ़ाने के अवसर मिले हैं।

ताकुला ग्राम सभा की निर्मला जोशी ने बताया कि वह वर्ष 2017 से भीमताल ब्लॉक के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। शुरुआत में उन्हें बाजार जाने, बैंक का काम करने और अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने में भी झिझक होती थी, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और वह अपने काम को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने लगीं।

निर्मला ने कहा कि आज वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने के साथ बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान दे पा रही हैं। उन्होंने बताया कि समूहों के माध्यम से महिलाएं नमक, शहद, मसाले, पहाड़ी नून, स्थानीय जड़ी-बूटियों और मोटे अनाज से जुड़े उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों तक भेजने का अवसर भी मिल रहा है।

निर्मला ने बताया कि उनके साथ 18 से 19 स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इन समूहों से घाट, भीमताल और हल्द्वानी ब्लॉक सहित विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं अपने उत्पाद भेजती हैं। इस नेटवर्क के माध्यम से लगभग 30 से 35 महिलाओं को रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। निर्मला ने सरकार की योजनाओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्वरोजगार ने ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मविश्वास के साथ काम करने का मौका दिया है।

निगलाट गांव की दीपिका मेहरा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उनका काम केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। वह पिथौरागढ़, मुनस्यारी, रामनगर, कोटाबाग और अन्य क्षेत्रों की महिलाओं के साथ भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समूहों की महिलाएं नमक, राजमा, अचार और अन्य स्थानीय उत्पाद तैयार करती हैं। कुछ महिलाएं राखियां भी बनाती हैं। इस तरह विभिन्न प्रकार के कामों से महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल रही है।

दीपिका ने कहा कि समूह के माध्यम से उन्हें बैंक से बिना ब्याज के ऋण की सुविधा मिलती है, जिससे अचार और जूस जैसे व्यवसाय शुरू करने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से बैंक से ऋण हासिल करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने पर उन्हें व्यवसाय आगे बढ़ाने के अवसर मिले हैं। उन्होंने सरकार से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सहयोग देने की व्यवस्था जारी रखने की उम्मीद जताई।

घुगु सिगड़ी गांव की पूजा बिष्ट ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें कैंटीन और किचन का काम मिला है। इससे उनके परिवार की आजीविका चल रही है। उन्होंने कहा कि उनके समूह से सात से आठ महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें इस काम के जरिए रोजगार मिला है। समूह से जुड़ने से पहले वह गांव में ही रहती थीं और आगे बढ़ने के अवसर सीमित थे। कैंटीन का काम मिलने के बाद उन्हें रोजगार के साथ अपना अनुभव बढ़ाने का मौका भी मिला।

पूजा ने आगे कहा कि स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपनी क्षमता पहचानने का अवसर दिया है। उन्होंने महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयासों के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

--आईएएनएस

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