नालंदा, 16 मार्च (आईएएनएस)। बिहार के राजगीर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत दो दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेला चल रहा है। इस मेले का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को मंच देना और उनके उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराना है।
इस मेले में बिहार के विभिन्न जिलों से पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़े बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, दर्जी, राजमिस्त्री, मोची और नाई समेत कई शिल्पकार शामिल हुए हैं। कारीगर अपने हाथों से बनाए उत्पादों की प्रदर्शनी लगा रहे हैं और उनकी बिक्री भी कर रहे हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना के कई लाभार्थियों ने बताया कि योजना के जरिए मिले प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता से उनके पारंपरिक काम को नया आयाम मिला है। कुछ कारीगर आधुनिक मशीनों की मदद से नए उत्पाद बना रहे हैं, तो कई महिलाएं सिलाई-कढ़ाई और हस्तशिल्प के जरिए घर बैठे ही रोजगार से जुड़ गई हैं।
इस मेले में शिल्पकारों को योजना से मिलने वाले लाभों के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत मुफ्त कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड, आधुनिक उपकरणों के लिए लगभग 15 हजार रुपए तक का टूलकिट प्रोत्साहन और बिना गारंटी के कम ब्याज दर पर एक से दो लाख रुपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए भी कारीगरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कुछ लाभार्थियों ने आईएएनएस से बातचीत की। गया जिले से आए सनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने इस योजना के तहत प्रशिक्षण लिया। इस योजना की खास बात यह है कि सरकार आपको बिजनेस बढ़ाने के लिए एक लाख रुपए का लोन भी मुहैया करा रही है। आगे आपका बिजनेस सही चलता है तो दो लाख रुपए का लोन भी मिल सकता है। उन्होंने बताया कि वे 10 साल से भगवान की मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। पीएम मोदी बहुत अच्छी योजना लेकर आए हैं।
रोहतास के बढ़ई घनश्याम ने बताया कि इस योजना के जरिए मैंने प्रशिक्षण लिया। इसके बाद सरकार की ओर से 1 लाख रुपए का लोन मिला है। उन्होंने बताया कि वे सीएनसी मशीन की मदद से नेमप्लेट और एक्रेलिक कटिंग का आधुनिक काम कर रहे हैं।
सिंकू देवी ने बताया कि उन्हें सिलाई की ट्रेनिंग के साथ स्टाइपेंड और मुफ्त मोटर वाली सिलाई मशीन के साथ पूरा टूलकिट दिया गया है। केंद्र सरकार की बहुत अच्छी योजना है। ट्रेनिंग के बाद मशीन मिली।
मसौढ़ी की प्रतिमा देवी ने बताया कि वे खिलौना बनाने का काम करती हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना से जिंदगी एक बार फिर पटरी पर लौटी है।
पटना के आदित्य राज ने बताया कि आईटीआई दीघा में पांच दिन की मुफ्त ट्रेनिंग के बाद उन्हें सर्टिफिकेट और लगभग 15 हजार रुपए का टूलकिट मिला है, जिसमें वॉशिंग मशीन और आयरन जैसे उपकरण शामिल हैं। इससे वे अपने काम को आधुनिक तरीके से कर पा रहे हैं। एक लाख का लोन भी मिला है।
गया के मूर्तिकार अरविंद रविदास ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बाजार की मांग के अनुसार नए उत्पाद बनाने और अपने काम में विविधता लाने की तकनीकें सीखने का मौका मिला, जिससे उनके काम को नई पहचान मिल रही है।
--आईएएनएस
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