नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। अच्छी नींद स्वास्थ्य की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन आजकल का सबसे बड़ा खतरा मोबाइल फोन बन गया है। बच्चों से लेकर बड़े तक नींद की जरूरत को ताक पर रखकर सेहत के साथ बड़ी खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट रात को सोने से पहले मोबाइल चलाने की इस आदत को न केवल नींद का साइलेंट किलर, बल्कि कई शारीरिक व मानसिक समस्याओं की जड़ भी बताते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार अच्छी नींद न मिलने से हृदय रोग, मोटापा, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए नींद को प्राथमिकता दें और स्क्रीन से दूरी बनाएं। अपनी नींद को बचाना आज के व्यस्त जीवन में सबसे जरूरी है। छोटे बदलावों के साथ इसे शुरू भी किया जा सकता है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने इसे ‘नींद का साइलेंट किलर’ बताया है। एक्सपर्ट के अनुसार, सोने से पहले मोबाइल चलाने की आदत धीरे-धीरे आपकी नींद की गुणवत्ता को नष्ट कर देती है। परिणामस्वरूप शरीर व मन दोनों पर बुरा असर पड़ता है। आपका फोन आपकी नींद को चुरा रहा है। ऐसे में सिर्फ एक छोटी-सी आदत बदलने से नींद की क्वालिटी कई गुना बेहतर हो सकती है।
एनएचएम के अनुसार, देर रात तक मोबाइल स्क्रीन देखने की आदत अब आम हो गई है। फोन की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है, जो शरीर को गहरी नींद लेने का संकेत देता है। नतीजतन, नींद देर से आती है, बीच-बीच में आंख खुल जाती है और सुबह उठने पर थकान महसूस होती है। लंबे समय तक यह आदत सिर्फ नींद ही नहीं खराब करती, बल्कि याददाश्त कमजोर होने, चिड़चिड़ापन बढ़ने, तनाव, डिप्रेशन और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।
ऐसे में एक्सपर्ट बताते हैं कि बेहतर नींद के लिए सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल पूरी तरह बंद कर दें। किताब पढ़ने, हल्का संगीत सुनने या ध्यान लगाने की आदत डालें। सोने से पहले बेडरूम को अंधेरा, ठंडा और शांत रखें। साथ ही, रात में फोन को दूसरे कमरे में या दूर रखने की कोशिश करें।
--आईएएनएस
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