नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन शानदार रहा था। भारतीय टीम ने रिकॉर्ड 7 स्वर्ण पदक जीते थे। इसमें पुरुष और महिला दोनों मुक्केबाजों ने स्वर्ण जीते थे। स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला मुक्केबाजों में एक नाम जैस्मिन लंबोरिया का भी था। लंबोरिया ने 57 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
कड़ी मेहनत, दृढ़ निश्चय और प्रतिभा के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली जैस्मिन लंबोरिया का जन्म 30 अगस्त 2001 को भिवानी, हरियाणा में हुआ था। भिवानी को 'लिटिल क्यूबा' के नाम से जाना जाता है। यह स्थान मुक्केबाजी का गढ़ है।
जैस्मिन के लिए मुक्केबाजी के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला आसान नहीं था। लड़की होने की वजह से उन्हें परिवार और समाज की रूढ़िवादी सोच से जूझना पड़ा, लेकिन एक बार सभी का विश्वास हासिल करने के बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जैस्मिन को अपने सफर में चाचा संदीप और परविंदर का भी बाद में साथ मिला, दोनों बॉक्सिंग में राष्ट्रीय स्तर पर विजेता रहे हैं।
भिवानी की लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी में जब जैस्मिन ने प्रशिक्षण शुरू किया, उस समय वहां कोई महिला मुक्केबाज नहीं थी। इसलिए उन्होंने लड़कों के साथ प्रशिक्षण लिया, जिसने उनकी तकनीक और आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
जैस्मिन ने 2021 में दुबई में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उसी वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में रजत पदक और 2022 में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 60 किग्रा लाइटवेट वर्ग में कांस्य पदक जीता। उन्होंने अस्ताना में 2025 में आयोजित विश्व बॉक्सिंग कप में जैस्मिन ने गोल्ड मेडल जीत वैश्विक मंच पर अपनी श्रेष्ठता साबित की। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक उनकी सबसे हालिया सफलता है। 25 साल की हो रही जैस्मिन से एशियन गेम्स और ओलंपिक में पदक की उम्मीद है।
--आईएएनएस
पीएके