नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर कारोबारी जगत में सकारात्मक माहौल है। बीआरआईएसईसी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन हरवंश चावला ने मंगलवार को कहा कि इस समझौते का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार पर दीर्घकाल में काफी सकारात्मक होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देगा और इसके नतीजे अगले छह महीने से एक वर्ष के दौरान सामने आने शुरू होंगे।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में हरवंश चावला ने कहा, "वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सालाना व्यापार लगभग 2.8 अरब डॉलर का है और दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन मेरा मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह लक्ष्य पांच साल नहीं, बल्कि दो से ढाई वर्षों में ही हासिल किया जा सकता है।"
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत और न्यूज़ीलैंड एक-दूसरे के बेहद महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बनकर उभरेंगे और दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
चावला ने आगे कहा कि भारत-न्यूज़ीलैंड व्यापार संबंधों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति है, विशेष रूप से पश्चिम एशिया का संकट। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कमोडिटी कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। इससे उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की लागत बढ़ रही है और आपूर्ति में देरी भी हो रही है।
उन्होंने कहा, "कई बार ऑर्डर मिलने से लेकर उसकी डिलीवरी तक कीमतों में बड़ा अंतर आ जाता है, जिसे व्यापारियों को ध्यान में रखना होगा।"
चावला ने सरकार से निर्यातकों के लिए अधिक सहायक वित्तीय योजनाएं लाने की मांग करते हुए कहा कि निर्यात क्षेत्र के लिए सस्ती ब्याज दरों और अधिक लचीली बैंकिंग सुविधाओं की जरूरत है, ताकि कारोबारियों को बड़े ऑर्डर पूरे करने के लिए पर्याप्त पूंजी मिल सके।
रोजगार के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि व्यापार दोगुना होता है तो इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी पड़ेगा। नए उद्योग, नई फैक्ट्रियां और बढ़ता उत्पादन रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कंपनी का कारोबार 100 करोड़ रुपए से बढ़कर 125 करोड़ रुपए होता है, तो उसका लाभ केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार और समग्र आर्थिक गतिविधियों में भी दिखाई देगा।
उन्होंने बताया कि एफटीए को लेकर यह धारणा सही नहीं है कि इससे रोजगार घटेगा, बल्कि व्यापार विस्तार के साथ रोजगार और निवेश दोनों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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