आने वाली पीढ़ियों को कश्मीर के गौरवशाली अतीत और उदार संस्कृति की कहानी बयां करेंगे बामजई स्मारक
आने वाली पीढ़ियों को कश्मीर के गौरवशाली अतीत और उदार संस्कृति की कहानी बयां करेंगे बामजई स्मारक

आईएएनएस

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। कोई भी खंडहर सिर्फ खंडहर नहीं होता, बल्कि स्मृतियों और इतिहास का घर होता है। हर खंडहर की दीवारों के पीछे अतीत से जुड़ी यादें छिपी रहती हैं। स्वामी विवेकानंद, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, जमशेदजी नसरवानजी टाटा, उर्दू कवि-दार्शनिक सर मोहम्मद इकबाल, कश्मीर के क्रांतिकारी कवि महजूर और कई अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों की यादों का भी एक ऐतिहासिक घर है, जो इन महान शख्सियतों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक चर्चाओं के अकेले गवाह के रूप में खड़ा है।

 

 

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अंतिम नवीनीकृत: 06 जून, 2021

 

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