मुंबई, 3 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले 67 पैसे चढ़कर दो महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यह जून के बाद घरेलू मुद्रा की अमेरिकी मुद्रा के खिलाफ सबसे बड़ी बढ़त है। इसकी वजह आरबीआई की एफसीएनआर (बी) स्कीम के तहत उम्मीद से ज्यादा इनफ्लो आना है।
डॉलर के मुकाबले रुपए की शुरुआत 94.30 पर हुई, जबकि आखिरी कारोबारी सत्र में यह 94.97 पर बंद हुआ था। दोपहर एक बजे डॉलर के मुकाबले रुपया 94.46 पर था।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से अमेरिकी डॉलर आकर्षित करने के लिए शुरू की गई विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) या (एफसीएनआर(बी)) जमा को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इसमें 31 अगस्त, 2026 तक कुल 127 अरब डॉलर का इनफ्लो आया है, जो कि अनुमान 100 अरब डॉलर से काफी ज्यादा है।
आरबीआई की ओर से जारी डेटा में कहा गया कि 31 अगस्त देश में एफसीएनआर (बी) जमा में 127.226 अरब डॉलर, बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) में 3.891 अरब डॉलर और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (ओएफसीबी) में 5.260 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया है।
आरबीआई ने रुपए की स्थिति को मजबूत करने के लिए विशेष अमेरिकी-डॉलर स्वैप सुविधा के तहत एफसीएनआर (बी), ईसीबी और ओएफसीबी स्कीम को 8 जून को शुरू करने का ऐलान किया है।
आरबीआई के मुताबिक, एफसीएनआर (बी) जमा 31 अगस्त तक ही निवेशकों के लिए खुली थी। वहीं, ईसीबी और ओएफसीबी योजनाओं में निवेशक 31 दिसंबर, 2026 तक निवेश कर सकते हैं।
करेंसी मार्केट के जानकारों के मुताबिक, रुपए के लिए छोटी अवधि में ट्रेडिंग रेंज 94.10-95.50 के आसपास रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर रुपया 94.10 के स्तर से नीचे मजबूती से टूटता है, तो यह 93.50 के स्तर तक जा सकता है। आरबीआई की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति उसे रुपए में बहुत ज्यादा गिरावट को रोकने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार को फिर से बढ़ाने के लिए ज्यादा जगह देगी।
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