आरबीआई ने खारिज की टाटा संस की सीआईसी पंजीकरण रद्द करने की अर्जी; लिस्टिंग की शर्त बरकरार: रिपोर्ट

आरबीआई ने खारिज की टाटा संस की सीआईसी पंजीकरण रद्द करने की अर्जी; लिस्टिंग की शर्त बरकरार: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) के रूप में पंजीकरण समाप्त करने की मांग को खारिज कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले के बाद कंपनी पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) होने से संबंधित नियामकीय आवश्यकताएं लागू रहने की संभावना है।

एनडीटीवी प्रॉफिट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि टाटा संस को वर्ष 2022 में अपर-लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया गया था और उसे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई की अपर-लेयर एनबीएफसी सूची में भी बनाए रखा गया है। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर बैंकों के समान अधिक सख्त नियामकीय निगरानी लागू होती है।

टाटा संस ने पहले आरबीआई से यह कहते हुए सीआईसी पंजीकरण समाप्त करने का अनुरोध किया था कि कंपनी अब ऋण-मुक्त (डेट-फ्री) हो चुकी है और इसलिए उसके लिए कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में पंजीकृत बने रहने की आवश्यकता नहीं रह गई है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई ने पहले टाटा संस को सितंबर 2025 तक सूचीबद्ध होने की आवश्यकता के बारे में भी अवगत कराया था। चूंकि कंपनी अभी भी नियामकीय ढांचे के तहत अपर-लेयर एनबीएफसी मानी जा रही है, इसलिए लिस्टिंग से जुड़े नियम उसके लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने उद्योग जगत की उन मांगों को भी स्वीकार नहीं किया है जिनमें बड़े एनबीएफसी के वर्गीकरण के लिए परिसंपत्ति सीमा बढ़ाने या पहले से मौजूद जटिल जोखिम-आधारित पद्धति को बनाए रखने का सुझाव दिया गया था।

इसके बजाय केंद्रीय बैंक ने अधिक सरल ढांचा अपनाने का फैसला किया है, जिसमें मुख्य आधार बैलेंस शीट का आकार होगा। संशोधित मानदंडों के तहत जिन एनबीएफसी की स्वतंत्र परिसंपत्तियां 1 लाख करोड़ रुपए या उससे अधिक होंगी, उन्हें बैंकों जैसी कड़ी नियामकीय निगरानी का सामना करना पड़ेगा। इनमें भविष्य में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता भी शामिल हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस लंबे समय से सार्वजनिक सूचीबद्धता का विरोध करता रहा है। कंपनी का मानना है कि लिस्टिंग के बाद खुलासों (डिस्क्लोजर), अनुपालन प्रक्रियाओं और नियामकीय आवश्यकताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी होने के कारण टाटा संस की संभावित लिस्टिंग का असर समूह की स्वामित्व संरचना और शेयरधारकों पर भी पड़ सकता है। इसलिए यह मुद्दा निवेशकों और उद्योग जगत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा संस नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया से भी गुजर रही है। कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एक और कार्यकाल नहीं लेने का निर्णय लिया है, जिसके बाद उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है।

हाल ही में टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) भी पर्याप्त कोरम न होने के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह टाटा संस के इतिहास में पहली बार हुआ जब एजीएम को टालना पड़ा। यह स्थिति सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े एक प्रतिबंध के कारण उत्पन्न हुई बताई गई थी।

--आईएएनएस

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