बलूचिस्तान में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत, छह घायल, मानवाधिकार संगठन ने की निंदा

बलूचिस्तान में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत, छह घायल; मानवाधिकार संगठन ने की निंदा

क्वेटा, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान की सेना की ओर से किए गए एक ड्रोन हमले में बलूचिस्तान के केच जिले के दस्त चेरी कुंजाती इलाके में खेतों में काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाया गया। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए।

मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'राज्य आतंकवाद' बताया। संगठन का कहना है कि यह घटना बलूचिस्तान में आम लोगों के सामने मौजूद खतरे और असुरक्षा की गंभीर स्थिति को दिखाती है।

मारे गए व्यक्ति की पहचान हाफिज खान के रूप में हुई है। घायलों में हकीम, इज्जत, गुल आलम, एहसानुल्लाह, मोहम्मद आलम और रहमतुल्लाह शामिल हैं। सभी क्वेटा के रहने वाले बताए गए हैं।

बीवाईसी ने कहा कि इन मजदूरों का किसी भी तरह के संघर्ष या हिंसा से कोई संबंध नहीं था। वे केवल अपने परिवारों का पालन-पोषण करने और अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए खेतों में काम कर रहे थे।

संगठन ने कहा कि इस हमले ने एक परिवार से उसका कमाने वाला सदस्य छीन लिया है, जबकि कई अन्य परिवारों को दुख और अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ दिया है।

बीवाईसी ने कहा, "बलूचिस्तान में आम लोगों की जिंदगी पहले ही कई मुश्किलों से भरी है, लेकिन जब खेतों में काम करने वाले मजदूर, अपने परिवारों के लिए मेहनत करने वाले लोग और रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे आम नागरिक भी हमलों से सुरक्षित नहीं हैं, तो सवाल उठता है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाएं? जब अपने घरों में रहना भी डर से खाली न हो और बच्चों के लिए रोजी-रोटी कमाने बाहर निकलना भी जानलेवा साबित हो, तो बलूचिस्तान के लोग आखिर कहां जाएं?"

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि नागरिकों की जान-माल की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना राज्य की मूल जिम्मेदारी है। लोगों को डर, असुरक्षा और लगातार खतरों के साए में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

बीवाईसी ने कहा, "सरकार की राजनीतिक विफलताओं और सुरक्षा नीतियों का बोझ आम नागरिकों, मजदूरों और किसानों पर डालना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।"

इस बीच, रविवार को बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के कार्यकर्ताओं ने जर्मनी के ट्रियर शहर में एक जागरूकता अभियान चलाया। इसका उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, जैसे जबरन गायब किए जाने, कथित फर्जी हत्याओं और नागरिकों के जबरन विस्थापन, की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था।

बीएनएम के अनुसार, अभियान में शामिल लोगों ने कथित तौर पर लापता व्यक्तियों की तस्वीरें प्रदर्शित कीं, पर्चे बांटे और राहगीरों को बलूचिस्तान में बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति के बारे में जानकारी दी।

अभियान में वक्ताओं ने रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि बलूचिस्तान के कलात जिले के शोर पारोद क्षेत्र के लगभग 30,000 निवासियों को पाकिस्तानी अधिकारियों ने 30 अक्टूबर तक अपने घर खाली करने का आदेश दिया है। उनका आरोप है कि कई पीढ़ियों से वहां रहने वाले परिवारों को तंबुओं में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम