नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर आधारित भारत की औद्योगिक वृद्धि इस वर्ष फरवरी में बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है, जो जनवरी में 4.8 प्रतिशत थी। इसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में तेज वृद्धि होना था। यह जानकारी सोमवार को सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा दी गई।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी आईआईपी में तीन-चौथाई है और इसमें फरवरी में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उच्च वृद्धि एक अच्छा संकेत है क्योंकि यह क्षेत्र देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से स्नातक करने वाले युवा स्नातकों को गुणवत्तापूर्ण रोजगार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में के 23 उद्योग समूहों में से 14 ने फरवरी 2026 में फरवरी 2025 की तुलना में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।
शीर्ष तीन सकारात्मक योगदानकर्ता हैं बुनियादी धातुओं का निर्माण (जिसमें इस्पात उत्पाद शामिल हैं), मोटर वाहन और मशीनरी एवं उपकरण (जिसमें ट्रैक्टर शामिल हैं)। इन तीनों क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
खनन क्षेत्र में फरवरी में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बिजली उत्पादन में इस महीने के दौरान 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों से पता चलता है कि कारखानों में उपयोग होने वाली मशीनों सहित पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में इस वर्ष फरवरी में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह सेगमेंट अर्थव्यवस्था में हो रहे वास्तविक निवेश को दर्शाता है, जिसका आगे चलकर रोजगार सृजन और आय में वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
फरवरी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में भी 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो बढ़ती आय के बीच इन वस्तुओं की बढ़ती उपभोक्ता मांग को दर्शाती है।
सरकार द्वारा राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे परियोजनाओं में किए गए बड़े निवेशों के कारण अवसंरचना और निर्माण सामग्री क्षेत्र में भी इस माह 11.5 प्रतिशत की मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है और समग्र आर्थिक विकास दर में वृद्धि होती है।
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