भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात वैश्विक वृद्धि से अधिक: नीति आयोग रिपोर्ट

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात वैश्विक वृद्धि से अधिक: नीति आयोग रिपोर्ट

नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। नीति आयोग द्वारा शुक्रवार को जुलाई-सितंबर 2025-26 के लिए जारी 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच भारत की वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में हिस्सेदारी 17.2 प्रतिशत की तेज चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी है। यह वृद्धि दुनिया की औसत 4.4 प्रतिशत वृद्धि से काफी ज्यादा है। इस तेजी का मुख्य कारण मोबाइल फोन के निर्यात में हुई भारी बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2024 के बीच भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग पांच गुना बढ़कर 42.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का कुल मूल्य 4.6 ट्रिलियन डॉलर है, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बनाता है। भारत ने मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार उपकरणों में खास मजबूती दिखाई है। भारत से इन उत्पादों का निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन और यूएई जैसे बड़े बाजारों में हो रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत के निर्यात में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बन गया है। यह केवल तकनीक से जुड़ा क्षेत्र नहीं है, बल्कि ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, दूरसंचार, रक्षा और डिजिटल सेवाओं जैसे कई अन्य उद्योगों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यह उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक सामान को जोड़ने (असेंबली) तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अब वह पुर्जे (कंपोनेंट) बनाने और ज्यादा मूल्य जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना के तहत 40,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से और गहराई से जुड़ना होगा, जिसमें सर्किट बोर्ड डिजाइन, सेमीकंडक्टर असेंबली, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एम्बेडेड सिस्टम जैसे क्षेत्रों में काम बढ़ाना जरूरी है। साथ ही बेहतर लॉजिस्टिक्स, उचित कर व्यवस्था और उद्योग से जुड़े कौशल विकास से इस क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स आज के आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की मुख्य कड़ी है। सेमीकंडक्टर और अन्य पुर्जों के साथ मिलकर यह व्यापार संतुलन और तकनीकी आत्मनिर्भरता तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि भारत ने फाइनल असेंबली यानी तैयार उत्पाद बनाने के स्तर पर अच्छी प्रगति की है, लेकिन लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कुछ बुनियादी समस्याओं को दूर करना जरूरी होगा। इसमें उत्पादन की लागत से जुड़ी चुनौतियों को कम करना, देश में ही कंपोनेंट्स का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना और बड़े निवेश के जरिए भारतीय कंपनियों को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूती से जोड़ना शामिल है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक व्यापार की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन सेवाओं का व्यापार अब भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत के निर्यात में करीब 8.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो आयात की तुलना में ज्यादा रही।

इसके अलावा, विकासशील देशों के बीच व्यापार 2005 से अब तक लगभग चार गुना बढ़ चुका है। वहीं भारत का व्यापार भी अब ग्लोबल साउथ के देशों के साथ तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में ई-कॉमर्स की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया गया है। भारत अब दुनिया के शीर्ष छह ई-कॉमर्स बाजारों में शामिल है, जहां ऑनलाइन खुदरा व्यापार का लगभग आधा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स का है।

--आईएएनएस

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