नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। आयकर विभाग ने मंगलवार को संदिग्ध फॉरेन रेमिटेंस के मामलों में राष्ट्रीय स्तर पर सत्यापन अभियान शुरू किया है। यह कदम आंकड़ों के विश्लेषण और जमीनी खुफिया जानकारी के बाद उठाया गया है, जिसमें पता चला कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कई ऐसी इकाइयों ने बड़ी मात्रा में विदेश धन भेजा है, जिनकी रिपोर्ट की गई कारोबारी गतिविधियां बहुत कम थीं या बिल्कुल नहीं थीं। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
बयान के अनुसार, यह सत्यापन अभियान मुखौटा कंपनियों, उनके पीछे मौजूद लोगों और फॉर्म 15 सीबी प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों पर केंद्रित है। देश की सीमाओं से लगे जिलों में स्थित और विदेशों में बड़ी मात्रा में धन भेजने वाली इकाइयों को भी इस अभियान के दायरे में शामिल किया गया है। इस अभियान के तहत लगभग 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों को शामिल किया गया है। इनमें बॉर्डर वाले राज्यों में स्थित 117 इकाइयां शामिल हैं।
विभाग ने फॉर्म 15 सीबी/फॉर्म 146 के तहत प्रमाणपत्र जारी करते समय पेशेवरों द्वारा उचित सावधानी बरतने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने के महत्व पर जोर दिया है।
बयान में कहा गया कि फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के एक समूह के खिलाफ चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान विदेशों में धन भेजने वाली इकाइयों के एक देशव्यापी नेटवर्क का पता चला। ये फर्जी ट्रस्ट फर्जी दान के बदले बोगस लेनदेन के लिए एंट्री उपलब्ध कराने में शामिल थे।
प्रारंभिक सत्यापन में सामने आया कि इन धन प्रेषणों को करने वाली इकाइयां या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करती थीं या बहुत कम कारोबार दिखाते हुए आयकर रिटर्न दाखिल करती थीं। उनके कारोबार का विदेश भेजी जा रही बड़ी रकम से कोई स्पष्ट संबंध नहीं था। ये रकम भेजने के बताए गए उद्देश्यों से भी मेल नहीं खाती थीं, जैसे माल ढुलाई का भुगतान, सॉफ्टवेयर का आयात या परामर्श सेवाओं का आयात।
वहीं, विभाग को जमीनी खुफिया जानकारी से पता चला कि ये इकाइयां वास्तव में उन पतों से संचालित नहीं हो रही थीं, जिन्हें उन्होंने घोषित किया था।
आंकड़ों के आगे के विश्लेषण से यह भी पता चला कि फॉर्म 15 सीबी के बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र अपेक्षाकृत कम संख्या वाले पेशेवरों के एक समूह ने जारी किए थे। भेजी गई रकम भी कुछ गिनी-चुनी इकाइयों के समूह को प्राप्त हुई थी। फॉर्म 15 सीबी के तहत विदेशी धन प्रेषण को प्रमाणित करने वाले अकाउंटेंट को खातों की पुस्तकों और अन्य संबंधित दस्तावेजों के आधार पर यह सत्यापित करना होता है कि उस धन प्रेषण पर कर देय है या नहीं। हालांकि, इन निष्कर्षों से यह सवाल उठता है कि क्या इन प्रमाणपत्रों को जारी करने से पहले अकाउंटेंटों ने पर्याप्त उचित जांच-पड़ताल की थी।
आयकर विभाग ने जोर दिया कि अकाउंटेंटों को धन प्रेषण को प्रमाणित करने से पहले संबंधित लेनदेन और उससे जुड़े तथ्यों की उचित जांच करनी चाहिए, क्योंकि ये प्रमाणपत्र व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बयान में कहा गया कि आगे की जांच फिलहाल जारी है।
--आईएएनएस
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