नवरात्रि में मां कूष्मांडा की पूजा को असम में एनीमिया और कुपोषण के खिलाफ अभियान से जोड़ा: हिमंत बिस्वा सरमा

नवरात्रि में मां कुष्मांडा की पूजा को असम में एनीमिया और कुपोषण के खिलाफ अभियान से जोड़ा: हिमंत बिस्वा सरमा

गुवाहाटी, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा को महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण के खिलाफ राज्य सरकार के प्रयासों से जोड़ा। उन्होंने केंद्र सरकार के पोषण अभियान के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाने वाली मां कूष्मांडा जीवन, स्वास्थ्य, पोषण और ऊर्जा का प्रतीक हैं।

दिन के धार्मिक महत्व को मातृ एवं बाल स्वास्थ्य से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सही पोषण की शुरुआत गर्भावस्था के दौरान ही हो जानी चाहिए और बच्चे के शुरुआती वर्षों तक इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पोषण अभियान के तहत असम भर के आंगनवाड़ी केंद्र गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पूरक पोषण, गर्म भोजन, स्वास्थ्य जांच और परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं।

उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी लाभार्थियों पर लगातार नजर रखते हैं ताकि माताओं और बच्चों को जरूरी सहायता मिल सके और कोई भी व्यक्ति इस कल्याणकारी योजना से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के पोषण माह अभियान का उल्लेख करते हुए 'हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी' संदेश को रेखांकित किया और पोषण संबंधी स्थिति में सुधार के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

सरमा ने कहा कि बेहतर पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरे राज्य के परिवारों और समुदायों की साझा जिम्मेदारी माना जाना चाहिए।

मातृ स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के बीच संबंध पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चों का पालन-पोषण करती है और अच्छी तरह पोषित बच्चे मजबूत असम के निर्माण के लिए जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से नवरात्रि के इस अवसर पर महिलाओं और बच्चों में एनीमिया तथा कुपोषण को समाप्त करने के संकल्प को और मजबूत करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में मां कूष्मांडा का आशीर्वाद मांगते हुए आशा व्यक्त की कि हर परिवार को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री का यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक महत्व को जन स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ता है और मातृ एवं बाल पोषण को असम के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के केंद्र में रखता है।

--आईएएनएस

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