भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले उद्योग जगत से चर्चा करेगा वाणिज्य मंत्रालय, निर्यातकों की चिंताओं पर होगा मंथन

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले उद्योग जगत से चर्चा करेगा वाणिज्य मंत्रालय, निर्यातकों की चिंताओं पर होगा मंथन

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर जारी बातचीत के बीच वाणिज्य मंत्रालय मंगलवार को उद्योग संगठनों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेगा, जिसका उद्देश्य भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं एवं सुझावों को समझना है।

बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे, जो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए भारत के मुख्य वार्ताकार भी हैं। बैठक में हाल के व्यापारिक रुझानों, विभिन्न क्षेत्रों के निर्यात प्रदर्शन और अमेरिकी बाजार से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

बैठक में फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग, वस्त्र, कृषि, रसायन, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, हस्तशिल्प और प्लास्टिक उद्योग के प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। इसके अलावा सीआईआई, फिक्की, एसोचैम और फियो जैसे प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श में शामिल होंगे।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं। वह 30 सितंबर से मिल्वौकी में आयोजित होने वाली जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे।

हाल ही में पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या कम से कम तुलनात्मक लाभ प्राप्त हो। इसी कारण मंत्रालय उद्योग जगत से सीधे फीडबैक लेकर यह समझना चाहता है कि मौजूदा शुल्क व्यवस्था और व्यापारिक बाधाओं का विभिन्न क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका दोनों फरवरी में तय किए गए ढांचे के आधार पर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर नियमित संपर्क बना हुआ है और वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

हालांकि, फरवरी में पहले चरण की प्रगति के बाद अमेरिका में कुछ नए घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे अनिश्चितता बढ़ी है। वर्तमान में भारतीय निर्यात पर अमेरिका में सेक्शन 301 जांच के तहत लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क का असर पड़ रहा है। यह जांच कथित जबरन श्रम संबंधी चिंताओं से जुड़ी हुई है।

इसके अलावा, अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक प्रतिबंध संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के निर्यात पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत उन देशों में शामिल है जो बड़ी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं। जुलाई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक रही थी।

हालांकि इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए वाणिज्य सचिव ने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है और भारत फिलहाल व्यापार समझौते पर रचनात्मक बातचीत जारी रखे हुए है।

--आईएएनएस

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