गुजरात पुलिस का ड्रग नेटवर्क के खिलाफ बड़ा फैसला, अब हर जिले और शहर में 'एंटी-नारकोटिक्स विंग' करेगी काम

गुजरात पुलिस का ड्रग नेटवर्क के खिलाफ बड़ा फैसला, अब हर जिले और शहर में 'एंटी-नारकोटिक्स विंग' करेगी काम

गांधीनगर, 5 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात की समुद्री सीमा देश में सबसे लंबी है। राज्य को पूरी तरह से 'नशा-मुक्त' बनाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। पुलिस ने गुजरात और दूसरे राज्यों के युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए काम किया है। इसी कोशिश के तहत अब गुजरात के हर जिले और शहर में खास 'एंटी-नारकोटिक्स विंग' (एएनडब्ल्यू) काम करना शुरू करेंगे।

गुजरात पुलिस की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ड्रग नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई को मजबूत और अधिक असरदार बनाने के लिए राज्य पुलिस प्रमुख ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने राज्य-स्तरीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की तर्ज पर अब हर जिले और कमिश्नरेट लेवल पर एएनडब्ल्यू यूनिट्स बनाई जाएंगी। इन सभी यूनिट्स को अगले 7 दिनों के अंदर काम शुरू करने का आदेश दिया गया है।

अभी, हर शहर और जिले में एलसीबी, एसओजी और लोकल पुलिस की टीमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामले दर्ज कर रही हैं। इसके अलावा, अब खास एएनडब्ल्यू यूनिट्स भी यह काम करेंगी। पिछले पांच सालों में गुजरात पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,700 से ज़्यादा मामले दर्ज किए हैं और 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान, लगभग 13,600 करोड़ रुपये कीमत के 1.36 लाख किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय ड्रग-स्मगलिंग नेटवर्क कमजोर हुए हैं।

हर एएनडब्ल्यू यूनिट में 8 काबिल अधिकारी और कर्मचारी होंगे, जिनमें 1 पुलिस इंस्पेक्टर, 1 पुलिस सब-इंस्पेक्टर, 2 एएसआई या हेड कॉन्स्टेबल और 4 पुलिस कॉन्स्टेबल शामिल होंगे। इस टीम के लिए एक अलग गाड़ी और ड्राइवर दिया जाएगा।

जिला स्तर पर यह यूनिट पुलिस सुपरिटेंडेंट (एसपी) की सीधी देखरेख में काम करेगी। अहमदाबाद शहर में 2 यूनिट, सूरत शहर में 2 यूनिट, वडोदरा शहर में 1 यूनिट और राजकोट शहर में 1 यूनिट जॉइंट या एडिशनल सीपी की देखरेख में काम करेंगी।

एएनडब्ल्यू एक 'स्पेशलाइज्ड टास्क फोर्स' के तौर पर काम करेगी और सिर्फ एनडीपीएस से जुड़े अपराधों पर ध्यान देगी। इस टीम को कोई और काम नहीं सौंपा जाएगा। एएनडब्ल्यू एएनटीएफ द्वारा पहचाने गए ड्रग पेडलर्स और हॉटस्पॉट्स पर लगातार नजर रखेगी और ड्रग्स के आदी अपराधियों के खिलाफ पीआईटी-एनडीपीएस के तहत एहतियाती कार्रवाई के लिए सीआईडी क्राइम को प्रस्ताव भेजेगी।

एएनडब्ल्यू के बनने के बाद भी स्थानीय पुलिस स्टेशन एनडीपीएस मामलों का पता लगाना जारी रखेंगे। अगर एएनडब्ल्यू की जांच के दौरान स्थानीय पुलिस की तरफ से कोई लापरवाही या ढिलाई पाई जाती है, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गुजरात पुलिस की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, गुजरात देश का पहला राज्य है जिसने ड्रग नेटवर्क को पकड़ने में मदद करने वाले पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को प्रोत्साहित करने के लिए 'ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी' और अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने वाले कर्मियों के लिए 'आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन' पॉलिसी लागू की है। देश में पहली बार, डार्क वेब गतिविधियों, फाइनेंशियल ट्रेल्स और इंटरनेशनल कनेक्शन का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-बेस्ड सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। अदालतों में सजा दिलाने की दर (कनविक्शन रेट) बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक जांच की जा रही है।

इसके अलावा, डिप्टी सीएम के मार्गदर्शन में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ, राज्य ड्रग की लत से प्रभावित युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपना रहा है। सही काउंसलिंग और इलाज मुहैया कराने के लिए राज्य भर में नशा मुक्ति केंद्रों को आधुनिक बनाया जा रहा है।

--आईएएनएस

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