नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और घाना के बीच ऐतिहासिक और दोस्ताना संबंध हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, राजनयिक, आर्थिक, व्यापारिक, विकास सहयोग और लोगों के बीच संपर्क जैसे बहुआयामी संबंध हैं, जो बेहद गहरे हैं। पश्चिम अफ्रीका में घाना भारत का एक अहम साझेदार माना जाता है।
भारत और घाना के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1957 में घाना की स्वतंत्रता के बाद स्थापित हुए थे। भारत का अकरा में उच्चायोग और घाना का नई दिल्ली में उच्चायोग स्थापित है, जो दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। भारत ने 1953 में अकरा में एक प्रतिनिधि कार्यालय खोला।
घाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 जुलाई 2025 को यहां के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना' से नवाजा गया था। यह सम्मान उन्हें घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने उनकी विशेष शासन कला और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्त्व के लिए प्रदान किया।
कंट्रीमीटर्स के हिसाब से 1 जनवरी 2026 तक घाना की अनुमानित जनसंख्या 35,430,408 है। इसका क्षेत्रफल करीब 2.38 लाख वर्ग किलोमीटर है। भारत की तुलना में घाना क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों में छोटा देश है। हालांकि, पश्चिम अफ्रीका में इसकी आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता इसे क्षेत्रीय रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
घाना को सोने के अपार संसाधन के लिए भी जाना जाता है। इसकी वजह से इसे गोल्ड कोस्ट भी कहा जाता है। बीते साल पीएम मोदी की घाना यात्रा के साथ दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच एमओयू भी साइन किए गए।
भारत और घाना के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी जारी है, जो दोनों देशों के बीच संबंध को अहम बनाता है। भारत घाना के रक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण देता है और शांति अभियानों में घाना की भूमिका को समर्थन कर रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के प्रति घाना में बढ़ती रुचि लोगों के बीच संबंधों को और गहरा करती है।
भारत घाना के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। भारत घाना से मुख्य रूप से सोना, कोको, कच्चा तेल, लकड़ी और अन्य खनिजों का आयात करता है। वहीं, भारत से घाना को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, कृषि मशीनरी, वाहन, इस्पात, प्लास्टिक उत्पाद, कपड़ा और उपभोक्ता वस्तुएं निर्यात की जाती हैं। इसके अलावा, भारतीय कंपनियां घाना में ऊर्जा, खनन, कृषि प्रसंस्करण, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं।
--आईएएनएस
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