गांधीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और हेल्थ मिनिस्टर प्रफुल पानशेरिया के नेतृत्व में गुजरात ने ऑर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक और गर्व की बात हासिल की है। 3 अगस्त को ‘नेशनल ऑर्गन डोनेशन डे’ के मौके पर नई दिल्ली के डॉ बीआर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए ‘16वें इंडियन नेशनल ऑर्गन डोनेशन डे’ सेरेमनी में गुजरात को तीन बड़े नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
इन अवॉर्ड्स के बारे में और जानकारी देते हुए हेल्थ मिनिस्टर प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि आईकेडीआरसी इंस्टीट्यूशन, जो पूरे देश में ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के फील्ड में पायनियर है, को 'ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन में लीडिंग गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एक्सीलेंस' अवॉर्ड मिला, अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल को डोनर्स से सक्सेसफुल ऑर्गन रिट्रीवल के लिए 'बेस्ट नॉन-ट्रांसप्लांट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर ( एनटीओआरसी)' अवॉर्ड मिला, और सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल को ब्रेन स्टेम डेथ की समय पर पहचान, रिश्तेदारों को सेंसिटिव काउंसलिंग और साइंटिफिक प्रोसेस के लिए 'बेस्ट ब्रेन स्टेम डेथ टीम' नेशनल अवॉर्ड मिला। इसके लिए हेल्थ मिनिस्टर प्रफुल पानशेरिया ने सभी मेडिकल स्टाफ को बधाई दी।
हेल्थ मिनिस्टर प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि साल 2025 के दौरान आईकेडीआरसी-अहमदाबाद में कुल 597 ऑर्गन ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए, जिसमें 502 किडनी, 86 लिवर और 9 पैंक्रियास ट्रांसप्लांट शामिल थे। इनमें से 380 मरीजों को पीएम-जेवी स्कीम के तहत फ्री ट्रांसप्लांट का फायदा मिला है। यहां इलाज कराने वाले 34 प्रतिशत मरीज दूसरे राज्यों से हैं, जो इस संस्था की नेशनल क्रेडिबिलिटी दिखाता है।
इसके अलावा, अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने साल 2025-26 के दौरान 104 ब्रेन स्टेम डेथ केस में से 48 मृतक डोनर से 171 जीवन देने वाले ऑर्गन और 34 टिशू सफलतापूर्वक निकाले हैं, जिससे कई मरीजों को नई जिंदगी मिली है। इसके अलावा, न्यू सिविल हॉस्पिटल, सूरत की टीम ने साल के दौरान 82 ब्रेन स्टेम डेथ केस को सफलतापूर्वक सर्टिफ़ाई करके ऑर्गन डोनेशन प्रोसेस को तेज और ज्यादा असरदार बनाया है।
मंत्री पानशेरिया ने आगे कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट, एसओटीटीओ गुजरात और सरकारी अस्पतालों के बीच मज़बूत तालमेल, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डॉक्टरों के डेडिकेशन की वजह से गुजरात देश में ऑर्गन डोनेशन के फील्ड में एक 'रोल मॉडल' बनकर उभरा है।
मैं उन परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और सलाम जाहिर करता हूं, जिन्होंने अपनों को खोने के बाद भी ऑर्गन डोनेशन का बड़ा फैसला लिया है। उनके एक फैसले ने आज कई नागरिकों को नई जिंदगी दी है। मौत के बाद शरीर को जलाने के बजाय किसी और को जिंदगी देना सबसे अच्छा दान है। पूरे राज्य के नागरिकों और अस्पतालों से मेरी विनम्र रिक्वेस्ट है कि सभी लोग ऑर्गन डोनेशन के बारे में जागरूक हों और इसमें हिस्सा लें ताकि किसी भी ब्रेन डेड व्यक्ति का अंग बेकार न जाए।
--आईएएनएस
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