प्रभा अत्रे: ‘जिन्होंने किराना’ घराने की खासियत को रखा बरकरार, गुरु-शिष्य परंपरा के लिए उठाया था ये कदम

IANS | September 13, 2024 8:26 AM

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। फिल्म संगीत हो, शास्त्रीय संगीत या फिर लोक संगीत। इस मॉडर्न युग में हर कोई म्यूजिक सुनता है, लेकिन इसे समझने की महारत सिर्फ चुनिंदा लोगों या फिर संगीत घरानों के पास ही होती है। संगीत पर अटूट पकड़ ही उन्हें महान बनाती है।

नींद बिना दवाई के आ जाए तो आपकी आधी फिक्र उड़नछू

IANS | September 10, 2024 2:43 PM

नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। बेफिक्र नींद स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। कैसे? तो बस हमारी अपनी चिकित्सा पद्धति के सहज सूत्रों का पालन कर। आयुर्वेद उपचार का नहीं जीवन को सही तरीके से जीने का नाम है। बस फिर क्या जीवन में कुछ खास सूत्रों को अपनाएं और निश्चिंत हो जाएं।

जयंती विशेष: असित हालदार रवीन्द्रनाथ टैगोर के 'नाती' जिनकी कूची ने रची कहानियां

IANS | September 10, 2024 11:36 AM

नई दिल्ली, 10 सितंबर, आईएएनएस। "तुम चित्रकार ही नहीं कवि भी हो यही कारण है कि तुम्हारी तूलिका से रस धारा बहती है, तुम्हारी चेतना ने मिट्टी में भी प्राण फूंक दिए हैं।'' गुरुवर रवीन्द्रनाथ टैगोर के यह शब्द उस रचनाकार के लिए हैं जिसने अपनी कूची के जरिए कहानियां रची। बीसवीं सदी का ऐसा कलाकार जिसे अंग्रेजों ने भी सम्मानित किया और जो गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर के रिश्ते में नाती लगते थे। नाम था असित के हालदार। जिनकी शैली जितनी सहज थी उतनी ही मानवीय संवेदनाओं को कुरेदने वाली भी।

जब कलम से निकले शब्द किन्नरों के दर्द से 'स्याह' हो पन्नों पर उभरे, साहित्य के सूरमा भी कराह उठे

IANS | September 10, 2024 8:28 AM

नई दिल्ली, 10 सितंबर(आईएएनएस)। समाज को साहित्य और साहित्य को समाज कैसे एक-दूसरे से जोड़ता है और कैसे एक-दूसरे के बीच यह सामंजस्य बिठाता है। यह साहित्यिक रचनाओं से साफ पता किया जा सकता है। समाज में समानता-असमानता, उतार-चढ़ाव, हानि-साभ, जीवन-मरण, अपना-पराया, स्त्री-पुरुष, अच्छा-बुरा सबके चित्रण का सबसे सशक्त जरिया अगर कुछ है तो वह साहित्य है। लेकिन साहित्य के शब्द इन दो विपरीतार्थक शब्दों के कोष से निकलकर किसी तीसरे शब्द के लिए कलम के जरिए पन्नों पर उतरते हैं तो उसका एक अलग ही मिशन होता है। ऐसा ही एक साहित्य रचा गया चित्रा मुद्गल की कलम से, कालजयी इस साहित्यिक रचना का नाम रखा गया 'पोस्ट बॉक्स नंबर-203 नाला सोपारा'।

अकबर इलाहाबादी : हिन्दुस्तानी ज़बान और तहज़ीब के दिलेर शायर

IANS | September 9, 2024 9:16 AM

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। अकबर हुसैन, जो बाद में अकबर इलाहाबादी हो गए, उन्होंने अपनी शायरी में युवाओं की जिंदगी को बहुत ही खूबसूरती से बयां किया है। "छोड़ लिटरेचर को अपनी हिस्ट्री को भूल जा, शैख़-ओ-मस्जिद से तअल्लुक़ तर्क कर स्कूल जा, चार-दिन की ज़िंदगी है कोफ़्त से क्या फ़ायदा, खा डबल रोटी क्लर्की कर खुशी से फूल जा"। अकबर इलाहाबादी की यह शायरी आज के दौर में भी बहुत प्रासंगिक है।

अतुलनीय एएमयू : सात छात्रों से शुरुआत, आज दुनिया के बेस्ट यूनिवर्सिटी में शुमार

IANS | September 9, 2024 8:45 AM

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए आज का दिन बेहद खास है। 9 सितंबर 1920 को अलीगढ़ का एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज 'अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय' में तब्दील कर दिया गया।

जब परिवार का खर्चा चलाने के लिए घर-घर जाकर ट्यूशन देने लगे सर्वपल्ली राधाकृष्णन

IANS | September 5, 2024 9:57 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षा की अलख जगाने वाले भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षकों के प्रयासों को समर्पित है। देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले राधाकृष्णन ने अथक प्रयास किया। तमाम परेशानियां झेलीं, घर खर्च चलाने के लिए होम ट्यूशन दिया पर शिक्षा के प्रति ईमानदारी कभी नहीं छोड़ी। अपने प्रोफेशन से उन्हें गहरा लगाव था।

जानिए, 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? क्या है इस बार की थीम?

IANS | September 5, 2024 9:20 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में शिक्षक दिवस की स्थापना का इतिहास 62 साल पुराना है। नींव 5 सितंबर 1962 को पड़ी। यह दिन भारतीय शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है। इसी दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, जिसने आपको किताबों का दिया ज्ञान वही नहीं हैं केवल आपके शिक्षक

IANS | September 5, 2024 8:47 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ हमारे संतों ने जगत में गुरु को ही सर्वश्रेष्ठ माना है। क्योंकि गुरु ही छात्रों के एक मात्र हितैषी हैं, वे सब कुछ करने वाले हैं, बिना उनके ज्ञान रूपी आशीर्वाद के कुछ भी नहीं होने वाला है। ऐसे में गुरु के अतिरिक्त किसी और पर भरोसा करने वाला ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता।

'गुनाहों का देवता' को गुजरे 27 बरस, एक रचनाकार जो हर चंदर और सुधा का बना संबल

IANS | September 4, 2024 9:46 AM

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। सर्दियों की हल्की धूप में ना ठंडक और ना गर्मी का अहसास, एक पहाड़ और हर तरफ हरियाली, कानों में कोयल की कूक, सब कुछ सपनों की दुनिया जैसी... अचानक सपना टूटता है, आंखें खुलती है और नजरें किताब के पन्ने पर पड़ती है।