नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के उद्योग जगत और संस्थागत प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका, निवेश अवसरों और ग्लोबल साउथ के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भरोसा जताया। रूस, मिस्र और अन्य ब्रिक्स एवं ब्रिक्स प्लस देशों के प्रतिनिधियों ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह मंच व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
रूस की कंपनी जीएसबीआई लिमिटेड के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अलेक्जेंडर कोकोव ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि नई दिल्ली में आयोजित यह मंच ऊर्जा और सकारात्मक माहौल से भरपूर है। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागी मिलकर काम करने के लिए उत्साहित हैं और उन्हें विश्वास है कि यह सम्मेलन बेहद सफल साबित होगा।
कोकोव ने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकों ने विभिन्न देशों के उद्यमियों को सीधे संवाद का अवसर दिया है। उन्होंने भारतीय उद्योग मंडल फिक्की (एफआईसीसीआई) की भूमिका की भी प्रशंसा की और कहा कि भारत की आर्थिक ताकत और अवसरों को प्रत्यक्ष रूप से समझने के लिए यहां मौजूद रहना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि रूस और भारत के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और दोनों देश एक ऐसे दौर की शुरुआत में हैं जो आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक साझेदारी का आधार बनेगा।
अलेक्जेंडर कोकोव ने आगे कहा कि उनकी संस्था ग्लोबल साउथ बिजनेस इनोवेशंस एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसज एंड एग्जीबीशन्स) उद्योग में काम करती है। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ब्रिक्स देशों की आर्थिक क्षमता को जोड़ने और व्यापारिक अवसरों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि संवाद, प्रदर्शनियों और कारोबारी सम्मेलनों के जरिए सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई गति मिल सकती है।
वहीं, रूस की स्किल डेवलपमेंट एजेंसी की उप निदेशक अलीना सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ब्रिक्स विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और विचारों का एक अनूठा समूह है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स दुनिया को यह दिखाने का अवसर देता है कि अलग-अलग पृष्ठभूमियों वाले देश भी साझा चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए एक साथ आ सकते हैं।
उन्होंने कहा, "सदस्य देश अपने-अपने अनुभवों और विशेषज्ञताओं को साझा करके एक-दूसरे से सीख सकते हैं और सामूहिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। यही ब्रिक्स की सबसे बड़ी शक्ति है।"
इस बीच, रशियन हेलीकॉप्टर्स ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय विपणन प्रबंधक मैक्सिम एंड्रियानोव ने भारत की अध्यक्षता और मेहमाननवाजी की सराहना करते हुए आईएएनएस से कहा कि इस वर्ष का ब्रिक्स सहयोग उनके लिए बेहद प्रोडक्टिव है। उन्होंने कहा कि समिट के दौरान कई नए संपर्क स्थापित हुए हैं और अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर चर्चा शुरू हुई है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल का कार्य भी इस वर्ष काफी प्रभावी रहा और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच कारोबारी सहयोग को बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
'मेक इन इंडिया' पहल पर चर्चा करते हुए एंड्रियानोव ने कहा कि जिन परियोजनाओं पर 'मेक इन इंडिया' की शर्तें लागू होती हैं, वे उसी ढांचे के तहत संचालित होती हैं। वहीं व्यावसायिक क्षेत्र में कंपनियां अक्सर लागत, दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को ध्यान में रखकर फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा कि अंततः उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद और सेवाओं की लागत भी महत्वपूर्ण कारक होती है।
इसके साथ ही, प्रिस्टीन लॉजिस्टिक्स एंड इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड में बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख परोमा मुंशी रेबेलो ने आईएएनएस से कहा कि उनका कार्य समूह इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है और इंफ्रास्ट्रक्चर मूल रूप से निवेश से जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों के दौरान हुई बैठकों और चर्चाओं के ठोस परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे ब्रिक्स प्लस देशों में भी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस बीच, मिस्र की संस्था इस्क्रा मेडेन फॉर इन्वेस्टमेंट एंड एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट के प्रतिनिधि इस्लाम सालेम ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इन्हें आगे ले जाने में निजी क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी।
उन्होंने कहा कि चैंबर ऑफ कॉमर्स जैसी संस्थाओं और निजी कंपनियों को आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "पिछले दो दिनों के दौरान कृषि, प्रौद्योगिकी, वित्त और कई अन्य क्षेत्रों पर हुई चर्चाओं से स्पष्ट है कि सदस्य देशों के बीच साझेदारी के अनेक अवसर मौजूद हैं।"
सालेम ने आगे कहा कि निजी क्षेत्र के दृष्टिकोण से देखें तो विभिन्न देशों के बीच संयुक्त परियोजनाओं, निवेश और तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत हो सकता है।
--आईएएनएस
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